बरेका में दशहरा की खुशियों में सौहार्द और प्रेम का रंग घोलने वाले पारंपरिक रूपक में इस बार गंवई माटी की सुगंध भी घुलेगी। राम वनगमन से रावण वध तक की कथा श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों, दोहों और छंदों के साथ कजरी, चैती, दादरा, कहरवा और कवित्त जैसी लोकधुनों में जीवंत होगी। पांच दृश्यावलियों में होने वाले ढाई घंटे के रूपक में 33 गीत और 53 दोहे-चौपाइयों का प्रयोग किया जाएगा।
20 अक्तूबर को बरेका के केंद्रीय खेल मैदान में होने वाले रूपक की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। रूपक की शुरुआत रघुनंदन राघव राम... गीत से होगी। इसके बाद गणेश, शंकर, पार्वती, दुर्गा और नारद के प्रवेश के साथ कथा आगे बढ़ेगी। पहली दृश्यावली में श्रीराम के वनगमन का प्रसंग विरह गीत से उभरेगा। होना था अभिषेक राम का, बन को गए रघुवीर... गीत के जरिये अयोध्या से वन जाने के भाव को प्रस्तुत किया जाएगा। गंगा पार करने के दौरान श्रीराम और केवट के संवाद को कहरवा की लोकधुन चरण धोआके चढ़ी रघुरड्या, रईया चरण धोआके... के जरिये भाव मिलेगा।
चित्रकूट में श्रीराम के स्वरूप पर मोहित शूर्पणखा अपने भाव कजरी के जरिये व्यक्त करेगी। मोरे रामा रघुवर की मोहनी मुरतिया, सुरतिया न बिसरे रे हरी... गीत इस प्रसंग को जीवंत करेगा। सीताहरण के बाद श्रीराम के सीता की तलाश में वन-वन भटकने के प्रसंग को चैती जनक किशोरी, सुकुमारी, दुलारी, तुझे कहां-कहां ढूंढू... के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
हनुमान और श्रीराम के मिलन के प्रसंग में कहरवा की धुन घूमै हो बटोहिया, पनहियों नईखे रे गोड़वा... सुनाई देगी। वहीं, मंदोदरी और रावण के संवाद को अब भी त्याग दीजै, मन का अभिमान सजना... जैसे लोकगीत के जरिये भाव दिया जाएगा। हनुमान के लंका दहन के बाद लौटने के प्रसंग में कव्वाली की तर्ज पर बजरंगबली जी आपने क्या जलवा दिखा दिया, लंका में जाके आपने डंका बजा दिया... प्रस्तुत किया जाएगा।
विजयादशमी समिति डीरेका के पूर्व महामंत्री और रूपक के निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि रूपक के जरिये विलुप्त होती लोकधुनों को सहेजने और लोकमानस के भावों को छूने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि ढाई घंटे में पांच दृश्यावलियों के जरिये राम वनगमन से रावण वध तक की कथा को समेटना आसान नहीं है। चुनौती तब और बढ़ जाती है, जब बरेका परिसर स्थित सभी विद्यालयों के बच्चों को अनुशासन के साथ राम और रावण समेत विभिन्न पात्रों की भूमिकाओं के लिए तैयार करना होता है।