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ताबूत की हुई जियारत, मांगी कोरोना के खात्मे की दुआ

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मौला अली की शहादत पर शहर की शिया मस्जिदों, इमामबाड़ों में मजलिस और मातम का एहतेमाम किया गया। घरों में भी मौला ए कायनात, मुश्किल कुशा हजरत अली की शहादत पर ताबूत की जियातर भी हुई।
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शनिवार को शिया मस्जिद में मजलिस को खिताब करते हुए हाजी फरमान हैदर ने बताया कि हजरत अली की शहादत 1402 साल पहले हुई थी। 19 रमजान की सुबह इब्रे मुल्जिम ने सुबह की नमाज के समय उनके सर केऊपर जहर बुझी तलवार से वार किया था। इसके दो दिन बाद 21 रमजान को इमाम की शहादत हुई थी। मजलिसों का सिलसिला मंगलवार तक चलेगा। कई जगह ताबूत उठाए जाएंगे, शब्बेदारी होगी। उन्होंने बताया कि जो जुलूस रविवार को उठाया जाना था वो कोरोना संक्रमण के कारण नहीं उठेगा।
एहतियात के तौर पर लोग कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार मजलिसों में शिरकत करेंगे और ताबूत की जियारत करेंगे। कई जगह ख्वातीन ने भी मजलिसों का आयोजन किया और मौला अली को मजलिसों के जरिये खेराजे अकीदत पेश किया। इस दौरान शिवपुर, अर्दली बाजार, चौहट्टा लाल खां, राजापुरा, बड़ी बाजार, मुकीमगंज, दालमंडी, चौक, शिवाला, बजरडीहा में आयोजन हुए।
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