रमजान की रुखसती के साथ ही रातों में इबादत का सिलसिला तेज हो गया है। हर रोजेदार की यही तमन्ना होती है कि काश रमजान के दिन और बढ़ जाते तो उन्हें ज्यादा इबादत करने का अवसर मिल जाता। रमजान की नेकियां साल भर रोजेदार की हिफाजत करती हैं।
रोजे के साथ ही मुस्लिम परिवारों में ईद की तैयारियां तेज हो गई हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण खरीददारी में रौनक नजर नहीं आ रही है। वहीं दूसरी तरफ खुदा के नेक बंदे हैं जो इन दुनियावी मरहले से दूर होकर अपने रब से रमजान के आखिरी वक्त तक दुआएं मांगने में लगे हुए हैं। इमाम मौलाना निजामुद्दीन ने बताया कि रमजान का आखिरी अशरा रोजेदारों के लिए खासी अहमियत रखता है।
खुदा के नेक बंदे सिर सजदे में और हाथ इबादत में उठाये खुदा से यही दुआ करते हैं कि इस बार इबादत ज्यादा नहीं कर पाया ऐ मेरे रब जिंदगी में रमजान की नेमत और मिल जाए ताकि और इबादत का मौका मिले। दुआओं के दौरान जार-जार रोने और गिड़गिड़ाने वाला खुदा के नजदीक बेहद पसंद किया जाता है। इसलिए खुदा के नेक बंदे रमजान की रुखसती पर दुआ के वक्त रो पड़ते हैं।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने रोजेदारों को सुझाव देते हुए कहा कि रमजान में कमाई नेकियों को संजो कर रखे। जो कुछ भी नेकियां रमजान में कमाई हैं उसे ईद में लुटा न दें, क्योंकि रमजान की नेकियां ही साल भर इंसान को बुरे कामों और बुराईयों से बचाती हैं।