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रामानंदाचार्य की जयंती: दो किमी लंबी शोभायात्रा, डांडिया रास के साथ बैंड बाजा; साध्वी हुईं शामिल

Sun, 11 Jan 2026 04:49 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: सजी-धजी पालकी में जगद्गुरु रामानंदाचार्य का चित्र पुष्प मालाओं से सुसज्जित था। संत-महंत अपने कंधों पर पालकी लेकर चल रहे थे। संतों से आगे बुंदेलखंड उरई से आए कलाकार डांडिया नृत्य की शैली पर विभिन्न प्रकार की कलाओं का प्रदर्शन करते हुए हर किसी का मन मोह रहे थे। 
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शोभायात्रा में शामिल कलाकार। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भगवान राम के अवतार जगद्गुरु रामानंदाचार्य की जयंती महोत्सव शनिवार को धूमधाम से मनाई गई। अस्सी घाट से खोजवां स्थित श्रीराममंदिर तक निकली दो किलोमीटर यात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी। शोभायात्रा में डांडिया नृत्य के साथ बैंड बाजा, साधु, संतों और साध्वी की टोलियां, रामानंद, कबीरपंथी और दंडी संन्यासियों की टोली भी शामिल हुई।

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श्रीराम मंदिर गुरुधाम में नौ दिन से चल रहे श्रीरामानंदाचार्य जयंती महोत्सव का समापन शोभायात्रा, भंडारा और संतों के प्रवचन के साथ हुआ। जयंती के उपलक्ष्य में अस्सी घाट से एक शोभायात्रा निकाली गई। महिलाएं अपने शीश पर कलश धारण करके भगवदनाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धा के साथ चल रही थीं।

भगवा ध्वज की रही धूम

शोभायात्रा में शामिल भक्त। - फोटो : संवाद
शोभायात्रा के प्रारंभ में श्री गणेश जी, भगवान शंकर जी, श्रीराम जी, श्रीकृष्ण जी की झांकियों के साथ-साथ देश के ऐतिहासिक शूरवीरों के स्वरूप को धारण किए हुए स्कूलों के छात्र चल रहे थे। छात्राएं भी अहिल्याबाई, रानी लक्ष्मीबाई व मीरा के रूप में सुसज्जित होकर शोभायात्रा में चार चांद लगा रही थीं। 

शोभायात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों से आई संकीर्तन मंडलियां अपनी पारंपरिक वेश-भूषा के साथ-साथ भगवदनाम संकीर्तन करते हुए भक्ति रस की वर्षा कर रही थीं। वाराणसी के साथ-साथ अयोध्या, वृंदावन, चित्रकूट से आए हुए संत भी पैदल चल रहे थे। काशी के विभिन्न संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारी बटुक विद्यार्थी जय का उद्घोष करते हुए साथ में भगवा ध्वज थामे हुए चल रहे थे।

यात्रा में कर्नाटक, वृंदावन, चित्रकूट से आई साध्वियां भी भगवान रामानंदाचार्य के समरसता के संदेश को दे रही थीं। बैंड बाजे के साथ यात्रा अस्सी से जगद्गुरु रामानंदाचार्य की चरणपादुका का पूजन कर प्रारंभ हुई। शोभायात्रा लंका, दुर्गाकुंड, कबीर नगर, गांधी चौक, काश्मीरीगंज, खोजवां, शंकुलधारा, चेतमणि चौराहा व गुरुधाम होते हुए श्रीराम मंदिर पहुंची।
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जगद्गुरु रामानंदाचार्य की जयंती मनाई। - फोटो : संवाद
शोभायात्रा के समापन पर श्रीराम मंदिर के प्रांगण में विशाल सभा का आयोजन हुआ। इसमें कबीर मठ के महंत विवेक दास, रामशरण दास, रामलोचन दास, सियाराम दास, पं. रामभरत शास्त्री, श्रवण दास, महामंडलेश्वर जालेश्वर गिरी सहित विभिन्न विद्वानों व संतों ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यकालीन भारत में रामानंदाचार्य ने मुगलिया सल्तनत के खिलाफ संतों को एकजुट कर सनातन धर्म का शंखनाद किया। आज रुढ़िवादिता को छोड़कर सभी को एकजुट होकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की जरूरत है।
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