लखन हृदय लालसा विसेषी/ जाइ जनकपुर आइअ देखी...। जाइ देखि आवहु नगर सुख निधान दोउ भाइ/करहु सुफल सबके नयन सुंदर बदन देखाइ...। बालकांड की इसी चौपाई और दोहे से रविवार शाम पीएसी गारद के पास सड़क पर ‘जनकपुरी दर्शन’ और ‘फुलवारी’ की लीला का मंचन शुरू हुआ। राजसी निशान के साथ सात घुड़सवारों की अगुवाई में काशिराज अनंत नारायण सिंह शाही बग्घी से पहुंचे। वह जैसी ही हाथी पर सवार हुए रामायणी मृदंग, झांझ की गूंज के साथ लीला के प्रसंगों का पाठ करने लगे। फिर आवाज गूंजी- चुप रहो... सावधान...। फिर राम मंचासीन विश्वामित्र से कहते हैं कि लक्ष्मण के हृदय में जनकपुर देखने की लालसा है लेकिन वह इस भाव को आपके समक्ष प्रगट करने में सकुचा रहे हैं। यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं उनको नगर दिखाकर आ जाऊं। इस पर मुनि विश्वामित्र कहते हैं- हे राम तुम नीति की रक्षा कैसे नहीं करोगे। तुम धर्म, मर्यादा का पालन करने वाले हो। सुख के निधान दोनों भाई जाकर नगर देख आओ। इसके बाद जैसे ही भगवान मुनि की आज्ञा पाकर खड़े हुए, राजा के हाथी भी जनकपुर के लिए चल पड़े। लीला प्रेमियों की भीड़ भी उनके पीछे चलने लगी। सड़क जाम हो गई।
कमर तक पीतांबर और दुपट्टों में तरकस बांधे हांथों में धनुष-वाण लिए राम-लक्ष्मण के घुंघराले बालों, कमल के समान नेत्रों और चंद्रमा के समान मुख की छवि देखने और उन्हें स्पर्श करने के लिए जनकपुरी के बालकों की भी भीड़ लग गई। वहां पहले से राजा जनक प्रण कर बैठे हैं कि जो शिव का पिनाक तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। जनकपुरी की रंगशाला में सजाकर रखे गए शिव के पिनाक का राम, लक्ष्मण ने दर्शन किया। इसके बाद वह मुनि के आश्रम में विश्राम करने लौट आए। वहां से फिर वह मुनि की आज्ञा लेकर पूजा के लिए पुष्प चुनने जनक की उस फुलवारी में जाते हैं, जहां वसंत ऋतु लुभाई हुई है। लीला पीएसी गेट से परिसर की फुलवारी में प्रस्थान करती है। लोग पीढ़ा, छड़ी, टार्च लिए फुलवारी की सड़कों से लेकर गिरिजा माता के मंदिर तक कुछ देर में ही पट जाते हैं। एक तरफ बांस के स्टैंड पर पंचलाइट जलाई जाने लगती है तो दूसरी ओर मशालची मशाल जलाकर फुलवारी को रौशन करने निकलते हैं।
उधर, सीता के वरण के लिए धनुष यज्ञ की घोषणा हो चुकी है। सीता फुलवारी में अष्ट सखियों के साथ गिरिजा जी की पूजा कर आशीर्वाद लेने जाती हैं। सखियां मंगल गीत गाती हुई सीता को घेरे रहती हैं। राम को देख सीता उनकी सांवली सूरत देखने की लालसा व्यक्त करती हैं। उसी समय आकाशवाणी होती है- जानकी हमारी सत्यवाणी सुनो.. तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी। जिसमें तुम्हारा मन लगा है, वही वर तुम्हें मिलेगा। वहीं राम सुंदरता को भी सुंदर करने वाली सीता को देखते रह जाते हैं।