जलमार्ग से खाद भेजने पर सब्सिडी मिलेगी। आईडब्ल्यूएआई ने उद्यमियों व व्यापारियों को लुभाने के लिए इस आशय का प्रस्ताव केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय को भेजा था, जिसे सैद्धांतिक तौर पर सहमति मिल गई है। जल्दी ही सड़क और रेल परिवहन की तरह खादांे के जल परिवहन को भी सब्सिडी की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यह जानकारी आईडब्ल्यू के चेयरमैन अमिताभ वर्मा ने गुरुवार को सर्वेयर बोट पर पत्रकारों को दी।
वर्मा ने बताया कि गंगा में इलाहाबाद से हल्दिया के बीच पांच निर्माण कार्य होने हैं। वाराणसी में मल्टी मॉडल टर्मिनल बनाने के लिए टेंडर हो चुका है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इसका शिलान्यास करेंगे। फरक्का में 350 करोड़ की लागत से नेविगेशन लॉक का निर्माण किया जा रहा है। हल्दिया और पटना में भी टर्मिनल निर्माण होना है। बताया कि सितंबर, 2018 तक रामनगर टर्मिनल और मार्च, 2019 तक सभी पांचों निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शुरू में 1000 से 1500 टन की क्षमता तक पानी के जहाज चलेंगे। ड्रेजिंग का काम पूरा होने के बाद दो हजार क्षमता तक के मालवाहक जलपोत गंगा में चलेंगे। बताया कि जलपरिवहन में निवेश के लिए निजी क्षेत्रों को ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी आमंत्रित किया गया है। बताया कि जलमार्ग से15 मीलियन टन तक 2020 तक, 22 मीलियन टन 2022 तक, 53 मीलियन टन 2035 तक व्यापार करने का लक्ष्य रखा गया है।
कछुआ सेंक्चुअरी के मामले में वर्मा ने कहा कि रिपोर्ट मुख्य वन्य जीव संरक्षक, उत्तर प्रदेश को दे दी गई है। यहां से यह फाइल पर्यावरण मंत्रालय को जाएगी और कुछ शर्तों के साथ जलपोतों के आवागमन के लिए अनुमति मिलने की संभावना है।