वाराणसी। रामनगर की रामलीला तो विश्व विख्यात है। इसके अलावा यहां प्रभु राम का एक मंदिर ऐसा भी है जहां हर साल प्रभु राम और माता जानकी के विवाह का आयोजन पारलौकिक अनुभूतियों से ओतप्रोत करने वाला है। दुनिया में इकलौता भगवान राम का मंदिर है जहां प्रभु श्रीराम अपने सभी भाइयों और उनकी पत्नियों के साथ विराजते हैं।
विवाह पंचमी की पूर्व संध्या पर हरिश्चंद्र महाविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अंशकालिक प्रवक्ता प्रो. ईशान त्रिपाठी ने बताया कि 1806 ईस्वी में मंदिर का निर्माण बनारस स्टेट की कन्या उमा बबुई ने करवाया था। यह मंदिर श्रीराम विवाह के कोहबर के रूप में स्थापित किया गया है। गर्भगृह में प्रभु राम, जानकी के साथ भरत-मांडवी, लक्ष्मण-उर्मिला के साथ शत्रुघभन और श्रुतिकीर्ति के नयनाभिराम विग्रह स्थापित हैं। रामदरबार की झांकी तो आपको हर कहीं सहज ही प्राप्त हो जाएगी, लेकिन चारों भाइयों का सपत्नीक ऐसा संगम विश्व में दुर्लभ है। इस मंदिर प्रांगण को और खास बनाता है यहां हर वर्ष आयोजित होने वाला राम जानकी विवाह। हिन्दू पंचांग के अनुसार अगहन शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन प्रभु राम और माता जानकी का विवाह संपन्न हुआ था।
जनकपुर मंदिर में राम-जानकी सहित सभी भाइयों का विवाह धूम धाम से आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही रामचरितमानस के बालकांड के राम विवाह की चौपाइयों का गायन इस अवसर को अध्यात्म से ओतप्रोत कर देता है। इस अवसर पर रामनगर की पीएसी की टुकड़ी द्वारा प्रभु राम को सलामी भी दी जाती है जो प्रतीकात्मक रूप से प्रजा द्वारा राजा के सम्मान की बानगी है।