राम की शक्ति पूजा का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
राम की शक्ति पूजा नाटक राम और रावण के युद्ध पर आधारित है। रावण पर विजय के लिए राम शक्ति की आराधना करते हैं। उन्होंने देवी को 108 नीलकमल अर्पित करने का संकल्प लिया था, लेकिन देवी चुपके से आकर आखिरी पुष्प चुरा ले जाती हैं। राम अपना नेत्र अर्पित कर डालने के लिए हाथों में तीर उठा लेते हैं तभी देवी प्रकट हो जाती हैं। उन्हें आशीष देती हैं।
पुरस्कृत कलाकार हैं टीम का हिस्सा
राम की शक्तिपूजा के निर्देशक हिंदी के जानेमाने लेखक, संस्कृतिकर्मी और नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल हैं। निर्देशन के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार मिल चुका है। वहीं, भगवान राम का अभिनय करने वाली स्वाति को अभिनय के लिए अकादमी ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार दिया गया है।
राम की शक्ति पूजा का मंचन
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हनुमान की भूमिका निभाने वाले तापस शुक्ल युवा कवि हैं और उन्हें हाल ही में रविशंकर उपाध्याय कविता पुरस्कार मिला है। सीताजी और देवी की भूमिका निभाने वाली नंदिनी ने ही नाटक का वस्त्र भी परिकल्पित किया है। लक्ष्मण की भूमिका साखी और यूथपति सुग्रीव की भूमिका शाश्वत निभाते हैं।
राम की शक्तिपूजा का संगीत बनारसी अंदाज का है। निर्देशक व्योमेश के साथ मिलकर आशीष मिश्र और जेपी शर्मा ने इसे तैयार किया था। इसमें बनारस के तबले और कथक के बोलों, वैदिक उच्चारण, खास बोल-बनाव की गायकी, अतुल शंकर की बांसुरी और अंकुर मिश्र के सितार की सुमधुर रागिनियों और फ्यूजन के कमाल को लोगों ने बहुत पसंद किया है।