भाई-बहनों के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन शनिवार को मनेगा लेकिन भद्रा लगने की वजह से बहनों को उस घड़ी का इंतजार करना पड़ेगा। नियमानुसार सुबह भद्राकाल में श्रावणी उपाकर्म भी वर्जित है लेकिन काशी के पंडितों ने प्रात:काल ही उपाकर्म करने का मन बनाया है। फिलहाल राखी दोपहर पौने दो बजे से भद्रा के बाद बांधी जा सकेगी।
भद्राकाल शुक्रवार की रात को 2:49 बजे ही शुरू हो गया। शनिवार की दोपहर 1:45 तक भद्रा लगा रहेगा। इस दौरान रक्षा सूत्र बांधने का काम वर्जित रहेगा। शास्त्र के अनुसार रक्षासूत्र भद्राकाल के बाद ही बांधना चाहिए। महावीर पंचांग के संपादक पं. रामेश्वर नाथ ओझा के अनुसार राखी रात को 12 बजे तक बांधी जा सकेगी। रक्षाबंधन के पर्व के लिए बहनें भाइयों के पास पहुंच रही हैं तो दूसरे शहरों में नौकरी या अन्य कार्यों से रह रहे भाई अवकाश लेकर राखी बंधवाने आ गए हैं।