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न्यायिक जांच आयोग ने बढ़ाई धुकधुकी

Wed, 19 Oct 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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जय गुरुदेव जनजागरण शोभायात्रा के दौरान राजघाट पुल पर हुई भगदड़ में 25 लोगों की मौत की घटना की जांच के लिए प्रदेश सरकार की ओर से न्यायिक जांच आयोग के गठन से जिले के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की धुकधुकी बढ़ गई है। कलेक्ट्रेट और पुलिस आफिस में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चाएं होती रहीं कि कार्रवाई की जद में छोटे से लेकर बड़े तक आएंगे और बचाव की गुंजाइश बेहद कम होगी। न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपने बचाव के लिए अधिकारियों ने शोभायात्रा की अनुमति सहित अन्य जरूरी बिंदुओं से संबंधित कागजात जुटाना शुरू कर दिया है।
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प्रदेश सरकार ने राजघाट पुल पर हुई भगदड़ की जांच की जिम्मेदारी इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज राजमणि चौहान को सौंपी है। जानकारों का कहना है कि राजघाट पर हुआ हादसा दो जिलों के पुलिस, प्रशासन और अभिसूचना इकाई की घोर लापरवाही का परिणाम है। न तो भीड़ का सही आकलन किया गया और न उस अनुसार ट्रैफिक, सुरक्षा सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। 

न्यायिक जांच के दौरान चंदौली के कटेसर स्थित आयोजन स्थल से संबंधित बीट सिपाही, हल्का प्रभारी, थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी, एडिशनल एसपी, उप जिलाधिकारी, एलआईयू के साथ ही एसपी और डीएम की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। इसी तरह वाराणसी के पुलिस, प्रशासन और एलआईयू की भूमिका की भी समीक्षा कर यह निर्धारित किया जाएगा कि किस स्तर पर और कैसे चूक हुई, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। ऐसे में न्यायिक जांच को लेकर दोनों जनपदों के पुलिस और प्रशासनिक अमले के जिम्मेदार लोगों की धुकधुकी बढ़ी हुई है कि न जाने कौन कार्रवाई की जद में आ जाए।
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