उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर के लिए इन समृद्ध विरासतों को न केवल भावी पीढ़ी के लिए पोषित और संरक्षित किया जाना आवश्यक है बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली के जरिए इन्हें बढ़ाना और इन्हें ने तरीके से उपयोग में भी लाना जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि 185 वर्षों के बाद भारतीयता पर यह शिक्षा नीति बनी है, जो आज के संदर्भ में ज्ञान की प्राचीन परंपरा को बताएगी।