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किसानों के लिए बरसी राहत, धान की रोपाई में आई तेजी

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Rainy relief for farmers increase in paddy transplantation
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वाराणसी। पिछले दो सप्ताह से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के राहत बरसी। बुधवार और बृहस्पतिवार को हुई बारिश से किसानों में उम्मीद की किरण जग गई। धान की रोपाई के लिए खेत में अब पर्याप्त पानी होने से रोपाई का काम शुरू हो गया। अगले एक सप्ताह ऐसा ही मौसम रहा तो पिछड़ चुकी धान रोपाई पूरी हो जाएगी।
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कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि यह बारिश अमृत वर्षा के समान है। जिन किसानों ने समय से रोपाई कर ली है उनके लिए काफी फायदेमंद है। वहीं, जिन किसानों ने उम्मीद छोड़ दी थी, उनके पास अंतिम मौका है। जिनके पास बीज की समस्या है वह कम अवधि वाली प्रजाति धान बीज का प्रयोग कर की सीधी बुआई कर सकते हैं। धान की सीधी बुआई के लिए 100 से 120 दिनों में पककर तैयार होने वाली नरेंद्र-97, नरेंद्र-118, नरेंद्र- 80 सीएसआर-43 जैसी प्रमुख धान की प्रजातियां हैं। इसे किसान छिड़काव विधि और हैप्पी सीडर, ड्रम सीडर जैसे कृषि यंत्रों के प्रयोग से बुआई कर अच्छा उत्पादन कर सकते हैं। किसान अधिक जानकारी के केंद्र पर संपर्क भी कर सकते हैं।
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किसान बोले
मिर्जामुराद के छोटी खजुरी गांव के किसान राममूर्ती यादव का कहना है कि ढाई बीघा से अधिक धान की रोपाई के लिए पिछले 20 दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे थे। कई किसानों ने उम्मीद छोड़कर वैकल्पिक खेती करने की तैयारी कर चुके हैं। लेकिन बारिश से अब उम्मीद बंधी है।
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मरुई इटही गांव के किसान रविंद्र कुमार पटेल ने बताया कि दो बीघा धान की रोपाई के लिए नर्सरी डाली थी। बारिश न होने से फैसला बदलना पड़ा। धान की नर्सरी नष्ट कर गेंदा के फूल और चौराई की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं।
दलहनी और तिलहनी बुआई भी कर सकते हैं किसान
जिला कृषि अधिकारी संगम मौर्य ने बताया के खरीफ सीजन में धान के अलावा जिन इलाकों में अभी पानी की कमी है, वहां के किसान अरहर, ज्वार बाजरा और तिल की बुआई कर सकते हैं। धान के मुकाबले अच्छा फायदा होगा।
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