फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi News: मलदहिया और रवींद्रपुरी में रुकता है बारिश का पानी, पार्षदों की शिकायत के बाद भी नहीं बनी गली पिट

Sun, 03 Jul 2022 03:05 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी शहर के कई ऐसे प्रमुख इलाके हैं जहां पर बारिश हो गई तो पानी निकालने में नगर निगम को पसीने छूटने लगते हैं। इनमें प्रमुख रूप से रवींद्रपुरी और मलदहिया चौराहे का इलाका है। 
विज्ञापन
बारिश के बाद रवींद्रपुरी मार्ग पर जमा पानी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वाराणसी शहर के कई ऐसे प्रमुख इलाके हैं जहां पर बारिश हो गई तो पानी निकालने में नगर निगम को पसीने छूटने लगते हैं। इनमें प्रमुख रूप से रवींद्रपुरी और मलदहिया चौराहे का इलाका है। जहां बारिश का पानी रुकता है। जिसे निकालने के लिए नगर निगम और जलकल के कर्मचारियों को काफी दिक्कत उठानी पड़ती है।

विज्ञापन


इन इलाकों के क्षेत्रीय पार्षदों ने नगर निगम का ध्यान आकृष्ट कराया है। जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो भारी बारिश में काफी परेशानी यहां की जनता को उठानी पड़ेगी। क्षेत्रीय लोगों और पार्षद के अनुसार गली पिट न होने और पाइप लाइनों की सफाई नहीं होने से पानी चोक कर रहा है। इस बारे में नगर निगम के मुख्य अभियंता मोइनुद्दीन ने बताया कि गली पिट बनवाने का निर्देश दिया गया है।

मलदहिया चौराहे के पास बारिश का पानी जमा होता है। जिसे दुरुस्त कराने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को सूचित किया गया है। पिछले दिनों सफाई कराई गई थी, लेकिन यहां गली पिट की जरूरत है। - सुशील गुप्ता, पार्षद, नदेसर
विज्ञापन


रवींद्रपुरी में एक भी गली पिट नहीं है। जिसके चलते काफी जलभराव होता है। नगर निगम से शिकायत की गई है। समय रहते काम पूरा नहीं कराया गया तो बारिश में आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ेगी। - सीता शर्मा, पार्षद, नवाबगंज

बारिश का पानी लगने से काफी परेशानी होती है। मलदहिया पर विनायक प्लाजा से लेकर विशुद्धानंद कानन आश्रम तक पानी लग जाता है। पानी निकलने भी देरी होती है। सीवर एवं नाली जाम रहता है। - नंद कुमार श्रीवास्तव, मलदहिया 

रवींद्रपुरी में 10-15 मिनट बारिश हो जाने के बाद शिवाला से लेकर आईपी विजया चौराहा एवं बाबा कीनाराम स्थल से लेकर रामचंद्र शुक्ल चौराहा तक पानी लग जाता है। जिसे निकलने में घंटों लग जाते हैं। - कैलाश माली, रविंद्रपुरी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें