बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के लिए रात से ही लंबी कतार में लगे भक्त सावन के तीसरे सोमवार को कठिन परीक्षा के दौर से गुजरे। मंगला आरती में वीआईपी भक्तों के दर्शन-पूजन में हुए विलंब के चलते आम भक्तों के लिए करीब घंटे भर देर से मंदिर खुल सका।
सुबह मूसलाधार बारिश शुरू होने से कतार में लगे भक्तों को जबरदस्त दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन तेज हवा-बारिश भी बाबा विश्वनाथ के भक्तों की आस्था नहीं डिगा सकी। देर शाम तक 1.30 लाख से अधिक भक्तों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ए. गजपति राजू और सूबे के धर्मार्थ मंत्री विजय मिश्र समेत कई विधायकों, अफसरों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई।
बोल बम के जयकारे के साथ आम भक्तों के लिए मंदिर सोमवार को सुबह पांच बजे खुला। कुछ देर बाद ही तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। सुबह छह बजे जब बारिश शुरू हुई तब पश्चिम में मजदा सिनेमा, उत्तर में बुलानाला और पूरब में दशाश्वमेध तक तीन तरफ से लंबी कतारें लगी हुई थीं।
इस दौरान तमाम भक्त बैरीकेडिंग से लगी दूकानों के चबूतरों से होकर आगे बढ़ने लगे। आस्था का कारवां चलता रहा। हालांकि सात बजे के बाद बारिश तेज हो गई और दिन के साढ़े 11 बजे तक इंद्रदेव ने ढील नहीं दी लेकिन इस दौरान 60 हजार से अधिक भक्त जलाभिषेक कर चुके थे।
कोई सिर पर पॉलीथिन बांधकर आगे बढ़ रहा था तो कोई छाता लगाकर। शिविरों से सेवादार प्लास्टिक की थैलियां लाकर कतारबद्ध भक्तों को वितरित कर रहे थे, ताकि बारिश के बाद भी कांवरिए आगे बढ़ते रहें। दिन के 12 बजे तक भीड़ का दबाव कम हो गया था। प्रशासन का सख्त निर्देश था कि लाइन में लगे भक्तों को कतई रोका न जाए।
जलाभिषेक वाले मार्गों पर दो पहिया वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगा दी गई थी। चार पहिया वाहनों को मैदागिन, लक्सा और सोनारपुरा से आगे नहीं बढ़ने दिया गया। जिलाधिकारी राजमणि यादव और एसएसपी जोगेंदर कुमार लगातार व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग कर रहे थे। एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय गोदौलिया चौराहे पर बैठकर खुद दर्शन की व्यवस्था संभाले हुए थे।