20 सैंपल भेजे लैब, 30 दिन बाद आएगी रिपोर्ट
खाद्य विभाग ने तीन दिनों की कार्रवाई में गुणवत्ता जांच के लिए मलदहिया, भोजूबीर, विशेश्वरगंज, सिगरा, रोहनिया समेत कई क्षेत्रों से बूंदी लड्डू, खोया, पनीर, छेना, बर्फी और रसगुल्ले के 20 नमूने लखनऊ प्रयोगशाला भेजे हैं। सवाल यह है कि नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में कम से कम एक महीने का समय लगेगा। तब तक त्योहार बीत चुका होगा और सैकड़ों कुंतल संदिग्ध मावा व मिलावटी मिठाइयां लोग खा चुके होंगे। 30 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
ऐसे करें नकली मिठाई की पहचान
मावा/खोया : मिठाई के एक छोटे टुकड़े को अंगूठे और उंगली के बीच रगड़ें। अगर यह शुद्ध है, तो इसमें से घी जैसी चिकनाई और खुशबू निकलेगी। मिलावटी मावा दानेदार होकर बिखर जाएगा या हाथों पर सूखा-सूखा लगेगा।
छेना/पनीर : रसगुल्ले या छेने की मिठाई को दबाएं। अगर वह रबड़ की तरह खिंचती है या स्पंज की जगह सख्त महसूस होती है, तो उसमें सिंथेटिक दूध या स्टार्च है।
असली दूध व घी की मिठाई मुंह में डालते ही घुलने लगती है। अगर मिठाई खाते समय तालू या दांतों में चिपचिपी लगे तो उसमें मैदा या आरारोट मिला है।
हल्का तीखापन, साबुन जैसा झागदार अहसास या कड़वाहट लगे, तो वह डिटर्जेंट/केमिकल युक्त सिंथेटिक दूध से बनी हो सकती है।
किसी प्रकार का मिलावटी पदार्थ मिलता है तो दुकानदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कई बार अत्यधिक संदिग्ध दिखने पर संबंधित दुकान को तत्काल सीज किया जाता है। -कौशलेंद्र शर्मा, सहायक आयुक्त, खाद्य विभाग