वाराणसी। शहर के बीच स्थित बेशकीमती जमीन को अर्बन सीलिंग घोषित होने के बाद भी इस पर अतिक्रमण नहीं थमा। 20 साल से लगातार इस जमीन को लेकर कई बार फर्जीवाड़े की कोशिश हुई। जबकि अधिग्रहण के बाद पुष्पलता ने अर्बन सीलिंग की जमीन को प्रशासन को सौंप दिया था। प्रशासन ने पुष्पलता से पूरी जमीन का अधिग्रहण किया और विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2002 में विभूति नगर योजना को इस जमीन पर लांच भी किया था। मगर जमीनों पर निगाह रखने वाले गिरोहों की शह पर तत्कालीन अधिकारियों ने पूरी योजना पर ही ग्रहण लगा दिया। उधर, शहर में कृष्णचंद्र राय की संपत्तियों को हड़पने के लिए वर्षों से अलग-अलग गैंग सक्रिय हैं।
पांडेयपुर स्थित साढ़े चार एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने के बाद प्रशासन ने कागजी कार्रवाई पूरी की और राय पुष्पलता से पूरी जमीन का हैंडओवर कराया था। जमीन अधिग्रहण होने के बाद इसे विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है और इस पर आवासीय योजना तैयार की गई। मगर, विकास प्राधिकरण की योजना पर ब्रेक के साथ ही इस जमीन पर फर्जीवाड़े का खेल शुरू हुआ। वर्ष 2017 में इस मामले में राय पुष्पलता से लीज डीड कराई गई और एक महीने के बाद लीज डीड कराने वालों ने ही वसीयतनामा बनवा लिया। इस मामले में पुष्पलता ही पहले सरकार और विकास प्राधिकरण से लड़ाई लड़ती रही, हालांकि बाद में उनकी बहन स्नेहलता भी पार्टी बनी। मगर, राय कृष्णचंद्र की वसीयत सामने आने के बाद स्थिति काफी साफ होती नजर आ रही है। यहां बता दें कि पांच सितंबर 2019 को राय पुष्पलता की मौत हो गई और 13 सितंबर 2019 को सरकारी जमीन बनारस व मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनियों को सट्टा इकरारनामा कर दिया गया। इस मामले में एमएलसी बृजेश सिंह के पुत्र सिद्धार्थ सिंह सहित सात लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था।
आखिर क्यों हटाई गई पुष्पलता की सुरक्षा
राय पुष्पलता ने कई मौकों पर अपनी जान को खतरा बताया था और 2014 में प्रशासन की ओर से गनर मुहैया कराए जाने का भी जिक्र किया था। मगर, थोड़े समय बाद उनकी सुरक्षा हटा ली गई। इसके बाद उनके पास तरह तरह के गिरोह राय पुष्पलता के पास सक्रिय हो गए थे। इसी दौरान राय पुष्पलता से इस जमीन की लीज डीड भी कराई गई थी।
वीडीए खंगाल रहा फाइल, क्यों फेल हुई योजना
विकास प्राधिकरण के अधिकारी अब इस जमीन से जुड़ी फाइलें खंगाल रहे हैं कि आखिर विभूति नगर योजना क्यों फेल हुई। सूत्रों की माने तो न्यायालय में वाद दायर होने के बाद योजना पर ब्रेक लगा और इसके बाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने भी इसमें नकारात्मक भूमिका निभाई। हालांकि नए सिरे से कागजात की पड़ताल के बाद पुरानी गलतियों की समीक्षा की जा रही है।
मंडलायुक्त की सक्रियता से बची सरकार की बेशकीमती जमीन
वाराणसी। विकास प्राधिकरण की विभूति नगर (राय साहब के बगीचा) की जमीन पर फर्जीवाड़ा कर 13 सितंबर को सट्टा इकरारनामा कराया गया। 24 सितंबर की रात को राय पुष्पलता की मौत के 17 दिन बाद उनकी तेरहवीं का कार्यक्रम कर जमीन पर कब्जे की साजिश थी। मगर, देर रात मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने पुलिस फोर्स भेजकर वहां मौजूद लोगों को खदेड़वाया। इसके बाद इस मामले की मॉनिटरिंग खुद कर रहे हैं।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल के निर्देश पर विकास प्राधिकरण ने एमएलसी बृजेश सिंह के पुत्र सिद्धार्थ सिंह, कुमारी पुष्पलता (मौत हो चुकी है), रामेश्वर प्रताप, पंकज कुमार सिंह, स्नेहलता गोयल, आलोक गोयल सहित अन्य लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ। 28 सितंबर को 2017 में लीज डीड कराने वालों पर भी मुकदमा दर्ज हो गया है। माना जा रहा है कि इस पूरी साजिश में शामिल सदर तहसील के कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई तय है।
अर्बन सीलिंग की जमीन घोषित होने के बाद से ही विकास प्राधिकरण का जमीन पर कब्जा है। जमीन पर दावा करने वालों का कोई अधिकार या उनके पक्ष में कोई कागज नहीं है। पड़ताल में कई तरह के कागज सरकार और प्रशासन के पक्ष में मिले हैं। तथ्यों के साथ ही न्यायालय में इन्हें प्रस्तुत किया जाएगा।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त