ट्रांसमिशन लाइन बनने के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को गुणवत्ता युक्त और निर्बाध आपूर्ति मिल सकेगी। साथ ही ग्रिड फेल होने की दशा में दूसरी ग्रिड से आपूर्ति मिलती रहेगी। इससे दूसरे राज्यों को भी बिजली आपूर्ति करने में आसानी होगी।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी के बालाजी ने बताया कि ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के बाद वितरण की जिम्मेदारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की होगी। इसका फायदा पूर्वांचल के सभी जिलों और दूसरे राज्यों को होगा। ट्रांसमिशन की लाइन पावर ग्रिड बनाती है। उन्होंने ही अनापत्ति मांगी है। इस लाइन के निर्माण से पूर्वांचल के 21 जिलों को बेहतर आपूर्ति हो सकेगी।
मिर्जापुर और वाराणसी के बीच वन भूमि से पारेषण लाइन जानी है। इसमें वन विभाग की 210 हेक्टेयर जमीन का गैर वानिकी प्रयोग होगा। यह परियोजना करीब 92 करोड़ रुपये की है। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के उपक्रम पावर ग्रिड वाराणसी ट्रांसमिशन सिस्टम लिमिटेड ने इसकी कार्ययोजना तैयार की है। अधीक्षण अभियंता विनीत रस्तोगी ने बताया कि यह प्रपोजल वाराणसी के लिए नहीं, बल्कि मिर्जापुर के लिए है।