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शादी की याद दिलाने पर पुनवासी ने बहन को पहचाना, 11 वर्ष बाद पाकिस्तान जेल से छूट कर हो रही घर वापसी

Mon, 04 Jan 2021 12:50 AM IST
विचित्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
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पाकिस्तान से लौटकर अमृतसर के हेल्थ सेंटर में पुनवासी। - फोटो : अमर उजाला।
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11 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद मिर्जापुर के पुनवासी की वतन वापसी हो गई है। इस समय वह अमृतसर में है। पाकिस्तान में यातनाओं के चलते उसकी याददाश्त खो गई है। शनिवार को पुनवासी को देखकर उसकी बहन फफक कर रो पड़ी। बहन ने उसे गले लगाया और फिर बचपन की बातें की। उसकी शादी कराने की बात याद दिलाई। इस पर पुनवासी ने बहन को पहचाना और उसे गले लगाया। शादी के बाद गौना होने के पूर्व ही पुनवासी लापता हो गया था।

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देहात कोतवाली के भरुहना निवासी पुनवासी 11 वर्ष पूर्व 2009 में भटककर पाकिस्तान चला गया था। दो वर्ष पूर्व पाकिस्तान की सरकार ने पुनवासी द्वारा बताए गए अधूरे नाम, पते की जानकारी भारत सरकार को दी। इसकी सूचना मिर्जापुर में आई। इसके बाद जिले के एलआईयू निरीक्षक इंद्रभूषण यादव ने किसी तरह से पुनवासी का पता खोजा। इसके बाद 17 नवंबर को पुनवासी को पाकिस्तान की ओर से अटारी बार्डर पर बीएसएफ को सौंप दिया गया। वतन वापसी के बाद उसकी घर वापसी में भी परेशानी हुई। इसके लिए अमर उजाला ने अभियान चलाया।

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तब तत्कालीन जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल और एसपी अजय कुमार सिंह के प्रयास से एक सिपाही के साथ उसकी बहन किरण और जीजा मुन्नू को एक जनवरी को वाराणसी से बेगमपुरा एक्सप्रेस ट्रेन से अमृतसर भेजा गया। शनिवार को किरण भाई पुनवासी से मिली। उस समय पुनवासी सो रहा था। उसे उठाया गया। भाई को देख बहन की आंखों से आंसू छलक पड़े पर पुनवासी खड़ा रहा। किरण ने अपने भाई को गले लगाया। चारपाई पर बैठा कर उसके बचपन की बातें बताईं। उसकी शादी की बात बताई। शादी के बाद उसका गौना होने वाला था, तभी वह लापता हो गया। ये बातें सुनकर पुनवासी किरण को पहचान गया।

भाई को खिलाया भूजा और गुड़

पुनवासी को भूजा और गुड़ बहुत पसंद था। किरण उसके लिए भूजा और गुड़ लेकर गई थी। शनिवार को उसने भाई को भूजा और गुड़ खिलाकर बचपन की बात बताती रही। पुनवासी ने भी बहन के हाथ का भूजा और गुड़ चाव से खाया।

वतन में भी बेगाने जैसा व्यवहार 

पाकिस्तान की जेल में यातनाएं झेल कर वतन लौटे पुनवासी के साथ अपने देश में ही बेगानों और बंदियों जैसा ही व्यवहार हो रहा है। अमृतसर के हेल्थ केयर सेंटर में ठंड के बाद भी उसे जैकेट आदि नहीं दिया गया है। भाई को लेने पहुंची बहन किरण ने कहा कि हेल्थ केयर सेंटर और जेल में आखिर फर्क क्या है।
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रुकने की भी नहीं थी व्यवस्था

भाई को लेने गई बहन किरण, जीजा मुन्नू और सिपाही मनोज के रुकने के लिए वहां के प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की थी। शनिवार को पहुंची बहन को यह चिंता सताने लगी कि आखिर दो दिन कहां रहेगी। उसका टिकट चार जनवरी को है। पुनवासी के परिवार को रेड क्रास के सराय में रुकवाया गया। वहां तक ले जाने के लिए  साधन उपलब्ध नहीं कराया गया।

बेगमपुरा एक्सप्रेस ट्रेन से लौटेगा पुनवासी

पुनवासी सोमवार को बहन किरण और जीजा के साथ बेगमपुरा एक्सप्रेस ट्रेन से घर के लिए चलेगा। जालंधर से सोमवार की दोपहर ट्रेन पर सभी बैठेंगे। ट्रेन मंगलवार को वाराणसी पहुंचेगी। उसके बाद वह बस से घर के लिए चलेंगे।
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