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बदल रही काशी: गंगा घाट से सारनाथ तक होम-स्टे, तीन महीने में आए 600 आवेदन; आम आदमी भी कमा रहा लाखों

Wed, 04 Feb 2026 02:15 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में घाट से सारनाथ तक होम-स्टे की सुविधा से आम लोग भी लाखों कमा रहे हैं। यहां अतिथि देवो भव: आजीविका बन गया है।  
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होम स्टे (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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वाराणसी जिले में होम-स्टे और गेस्ट हाउस की संख्या तेजी से बढ़ रही है। काशी का पर्यटन बढ़ने के साथ होम स्टे लोगों की आजीविका का साधन बन गया है। कई परिवार जो पहले सीमित संसाधनों में जीवन यापन कर रहे थे, आज अपने घरों के कमरों को पर्यटकों के लिए खोलकर महीने में लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

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पर्यटन विभाग और भारत पर्यटन के पास बीते तीन महीने में 600 से ज्यादा आवेदन आए हैं। इनमें 99 को संचालन की अनुमति दी गई है। खास बात यह है कि इनमें करीब 200 आवेदन मैदागिन से गोदौलिया और दशाश्वमेध क्षेत्र से आए हैं। जबकि सारनाथ और इसके आसपास के क्षेत्रों से 100 से ज्यादा आवेदन आए हैं। यहां के लोगों ने अपने घरों को होम-स्टे में बदलकर लिया है। विभागों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्राप्त 600 आवेदनों में से अब तक 99 को अनुमति दी जा चुकी है, जबकि शेष आवेदनों की जांच प्रक्रिया चल रही है।

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वीकेंड में पर्यटकों को नहीं मिल रही जगह

काशी में बीते साल 12 महीनों में 14.70 देसी और विदेशी पर्यटक आए। इसी बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए दो साल में विश्वनाथ मंदिर और आसपास के इलाकों में 800 से अधिक छोटे-बड़े गेस्ट हाउस और होम स्टे खुल गए हैं। स्थिति यह है कि छह फीट चौड़ी गलियों में 100 मीटर के दायरे में भी एक से अधिक गेस्ट हाउस और होम स्टे खुले हैं। इसके बावजूद त्योहारी और पर्यटन सीजन में वीकेंड के दौरान पर्यटकों को कमरे नहीं मिल रहे हैं। जिन जगहों पर मिल रहे हैं, वह जरूरत से ज्यादा किराया ले रहे हैं। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे रोजगार के नए विकल्प सामने आ रहे हैं।
 
काशी में पर्यटन बढ़ने के साथ युवाओं के रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई है। होम स्टे और गेस्ट हाउस से लोगों की कमाई बढ़ रही है। इसके लिए विभाग में आवेदन आने के बाद उनकी जांच की जाती है। इसके बाद अनुमति दी जा रही है। -पावस प्रसून, सहायक निदेशक, भारत पर्यटन
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