वाराणसी। अगर आपको यह लगता है कि कोरोना वायरस का संक्रमण जल्द ही खत्म होने वाला है तो ऐसा नहीं है। इसे लेकर अध्ययन चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना संक्रमण का काल सितंबर तक रहने की संभावना है। अधिक से अधिक घर में रहने और सोशल डिस्टेंसिंग से इस बीमारी को मात दी जा सकती है।
अमर उजाला से बातचीत में आईएमएस बीएचयू मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रो. केके गुप्ता ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान के हिसाब से संक्रमण को लेकर अध्ययन चल रहा है। प्राथमिक स्तर पर यही परिणाम आया है कि सितंबर तक संक्रमण का ग्राफ इसी तरह बढ़ते रहने की संभावना है। सरकार ने जो क्लस्टर और जोन बनाए हैं, उसे ध्यान में रखकर काम करते रहना होगा। दुकान खुलें, लेकिन एक-एक दिन के अंतराल पर। यहां सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन कराया जाए। यह जरूरी है कि जो गाइडलाइन स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई है, उसका पालन किया जाए। सरकार तो बहुत काम कर रही है, कुछ हमें भी करने की जरूरत है।
हर घर में बनाना होगा क्वारंटीन रूम
प्रो. केके गुप्ता ने कहा- बीमारी से बचाव के लिए बेहतर यही होगा कि हर घर में एक कमरे को क्वारंटीन रूम बना दिया जाए। ताकि बुजुर्ग या फिर बीमार व्यक्ति को आइसोलेट किया जा सके।
सवाल : लोगों का मानना है कि तापमान बढ़ेगा तो कोरोना का संक्रमण खत्म हो जाएगा?
जवाब : ऐसी कोई संभावना नहीं है। अब तक जो भी रिसर्च हैं, उसमें भी कोई इस तरह की बात नहीं है। लद्दाख जैसे ठंडे और राजस्थान जैसे गर्म तापमान वाले प्रदेशों में भी कोरोना का संक्रमण है। इस तरह से यह केवल भ्रांति है। इस तरह की कोई रिसर्च नहीं आया है, जिसके आधार पर कहा जा सके कि तापमान के साथ यह वायरस गायब हो जाएगा।
सवाल : बच्चे भी कोरोना की जद में आ रहे हैं। आप क्या मानते हैं, क्या वजह है?
जवाब : बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, ऐसे में उनमें संक्रमण का खतरा अधिक है। अगर बीमार हैं तो भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हैं। इसीलिए बुजुर्गों के साथ बच्चों को ज्यादा सावधानी बरतने को कहा जा रहा है। ज्यादातर मौत होने में भी डायबिटीज, किडनी, फेफड़ा की बीमारियां वजह बन रही हैं।
सवाल : कोरोना के संक्रमण का असर किन-किन वस्तुओं से सबसे ज्यादा है?
जवाब : अब तक आईसीएमआर की ओर से ऐसी कोई गाइडलाइन नहीं दी गई हैं। फिर भी यह माना जा रहा है कि कोई भी वस्तु अगर संक्रमित होती है तो 8 से 24 घंटे तक असर रहता है। स्टील के बर्तन पर लंबे समय तक कोरोना रह सकता है, इसलिए उन्हें भी साबुन से धोते रहना चाहिए। प्लास्टिक के बर्तनों पर भी वायरस का असर रहता है।
सवाल : देशभर में प्लाज्मा थेरेपी की बात हो रही है। कुछ मरीज ठीक भी हुए हैं। आप क्या मानते हैं?
जवाब : प्लाज्मा थेरेपी कोरोना को मात देने वाले मरीज की एंटीबॉडी निकालकर संक्रमित मरीज में इंजेक्ट करने की प्रक्रिया है। लेकिन यह पता नहीं चल पाता है कि एंटीबॉडी कितनी प्रभावी होगी। इसका असर होगा या नहीं। चूंकि ठीक हुए मरीज में और भी एंटीबॉडी होती है, इसीलिए वह संक्रमित मरीज के लिए नुकसानदायक भी हो सकती हैं। रिसर्च के बाद आईसीएमआर से जब तक स्वीकृति से न मिल जाए। तब तक इस विषय से दूर रहना चाहिए।
सवाल : कई ऐसे संक्रमित मिले हैं, जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखे?
जवाब : प्री सिंप्टमेटिक वालों के मिलने से हर कोई दुविधा में है कि किसे संदिग्ध माना जाए या न माना जाए। इसलिए टच मी नॉट, गेट मी नॉट, डोंट टच मी- डोंट गेट द वायरस यानी सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें।
सवाल : किस तरह का खानपान होना चाहिए?
जवाब- तीन चीजों को ध्यान में रखना होगा। समय पर भोजन करें, संतुलित आहार लें और नींबू, आंवला, संतरा व मौसमी फल खाएं। जिंक कंटेनिंग साल्ट का भी सेवन करना ठीक होगा, इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। बच्चों को फल जरूर खिलाने चाहिए। साथ ही दादी मां के नुस्खे मानते हुए दूध में हल्दी डालकर दे सकते हैं।