विजय राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन में अधिकारी थे और पिता के निधन के बाद वह नौकरी छोड़कर वाराणसी आ गए। यहां पर उन्होंने अपना निजी व्यवसाय शुरू कर दिया था। अपने पीछे वह अपनी दो बहनों को छोड़ गए हैं।
निजी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही गंभीर है। कोरोना काल में सभी मरीजों का हर संभव इलाज करने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है। लापरवाही बरतने वाले असपतालों पर कार्रवाई होगी।
डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ
राखी बांधने वाले हाथों ने दी भाई को मुखाग्नि
जिन हाथों से कभी भाई की कलाई पर राखी बांधी थी, उन्हीं हाथों ने जब भाई की चिता को मुखाग्नि दी तो आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हरिश्चंद्र घाट पर मौजूद हर एक शख्स की आंखें भी नम हो उठीं। बीएचयू की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य ने जब अपने भाई विजय भट्टाचार्य की चिता को आग दी तो वह अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं।
छोटी बहन मालविक भट्टाचार्य ने उन्हें संभाला। विजय की रविवार की दोपहर मौत हो गई थी। परिवार में किसी पुरुष सदस्य के नहीं होने पर डॉ. मधुमिता ने ही अपने भाई को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया। विजय आठ महीने से बीमार चल रहे थे।