दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता के पति ने पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल से शिकायत की थी कि बिना किसी बीमारी के चंद्रभूषण जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड संख्या-7 में भर्ती है। वार्ड में रात में उसकी पत्नी रहती है। दिन में परिजन और 10-12 अन्य लोग रहते हैं। चंद्रभूषण की सुरक्षा में चंदौली जिले के मुख्य आरक्षी मोहन कुमार और मेराज 12-12 घंटे की शिफ्ट में सशस्त्र तैनात रहते हैं।
पुलिस आयुक्त ने मेडिकल बोर्ड का गठन करा कर चंद्रभूषण की बीमारी का पता लगाने और अस्पताल में बाहरी व्यक्तियों से उसके मिलने व रहने के बारे में जांच कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा।
पुलिस आयुक्त के पत्र पर जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने एडीएम (भू-राजस्व) विपिन कुमार और डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष राय की जांच टीम गठित की। फिलहाल डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल से संबद्ध हैं। वहीं, चंद्रभूषण को दुष्कर्म के मामले में जमानत मिल चुकी है।
इतने लंबे समय तक भर्ती किया जाना आवश्यक नहीं था
एडीएम (भू-राजस्व) और डिप्टी सीएमओ ने 28 दिसंबर 2024 की शाम चंद्रभूषण सिंह के वार्ड का निरीक्षण किया। जांच टीम ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी कि 30 नवंबर 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक डॉ. शिवेश जायसवाल की देखरेख में चंद्रभूषण राजकीय अस्पताल में भर्ती रहा।
प्रथम दृष्टया मरीज अस्वस्थ नहीं प्रतीत हुआ। चंद्रभूषण के बेड हेड टिकट के आधार पर उसे इतने लंबे समय तक जिला अस्पताल में भर्ती किया जाना आवश्यक नहीं था। पुलिस अभिरक्षा में होने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित हेड कांस्टेबल सुशील यादव के पास ऐसा कोई रजिस्टर नहीं था, जिस पर यह दर्ज हो कि चंद्रभूषण से कब और कौन मिलने आया।
चंद्रभूषण को अस्पताल में भर्ती करने के मामले में डॉ. शिवेश जायसवाल, सुरक्षा व्यवस्था में तैनात चंदौली के मुख्य आरक्षी मोहन कुमार व मेराज खान और मौके पर मिले मुख्य आरक्षी सुशील यादव की संलिप्तता प्रतीत होती है। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने डॉ. शिवेश जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है।
नियम विरुद्ध तरीके से चंदौली से मंगवाए पुलिसकर्मी
बंदी चंद्रभूषण की सुरक्षा में चंदौली के पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाए जाने पर जिलाधिकारी ने जिला जेल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की। जेलर राजेश कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया ने नियम विरुद्ध तरीके से वाराणसी से पुलिस की मांग न करके चंदौली से पुलिसकर्मियों को मंगवाया।
बंदी चंद्रभूषण के किसी दबाव अथवा प्रभाव में आकर डिप्टी जेलर ने उसे जिला अस्पताल भिजवाया। इसके लिए डिप्टी जेलर दोषी हैं। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा है।
आरोप लगाने के बाद हटीं डिप्टी जेलर और जेल अधीक्षक
जिला जेल की पूर्व डिप्टी जेलर मीना कन्नौजिया ने गत दिनों वीडियो और प्रार्थना पत्र जारी कर तत्कालीन अधीक्षक डॉ. उमेश कुमार सिंह पर भ्रष्टाचार, उत्पीड़न और प्रताड़ना का आरोप लगाया था। कारागार प्रशासन के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आरोपों की जांच प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल की वरिष्ठ अधीक्षक को सौंपी गई। इसके बाद मीना को नैनी सेंट्रल जेल से संबद्ध कर दिया गया। डॉ. उमेश को सोनभद्र जिला जेल का अधीक्षक अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया।