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रविदास मंदिर में मत्था टेकना चाहते हैं मोदी

Tue, 16 Feb 2016 02:05 AM IST
वाराणसी, अमर उजाला ब्यूरो
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माघी पूर्णिमा पर 22 फरवरी को काशी आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास मंदिर में मत्था टेकने की इच्छा जताई है। प्रधानमंत्री के मंदिर आने के संकेत मिलने के बाद केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला ने सोमवार को व्यवस्थाएं परखीं और तैयारियों की जानकारी ली।
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बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में हुई बैठक में संकरे रास्ते से होकर पीएम की फ्लीट मंदिर तक कैसे लाई जा सकती है, इसे लेकर गंभीर मंथन किया गया। सुझाव दिया गया कि बीएचयू परिसर से जुड़े मंदिर मार्ग को कुछ देर के लिए रोक कर प्रधानमंत्री को वहां तक ले जाने की व्यवस्था की जाए। फिलहाल वह मंदिर किस रास्ते से जाएंगे, सुरक्षा कारणों से वहां तक पीएम की फ्लीट ले जाना संभव होगा या नहीं, यह सब एसपीजी पर निर्भर करेगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संत रविदास मंदिर में हाजिरी लगाने की इच्छा के बाद रास्तों से लेकर सुरक्षा प्रबंधों तक की समीक्षा होने लगी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री विजय सांपला ने सोमवार को दिन के 11 से 12 बजे तक बीएचयू के एलडी गेस्ट हाउस में अफसरों के साथ मंदिर जाने वाले रास्तों पर प्रधानमंत्री की फ्लीट उतारने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार-विमर्श किया। फिलहाल प्रधानमंत्री के रविदास मंदिर जाने के लिए बीएचयू परिसर से निकलने वाली सड़क पर ज्यादा फोकस किया गया।
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अफसरों का कहना था कि अगर संत रविदास पब्लिक जन्मस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट अगर चाहे तो तो घंटे भर के लिए मंदिर से बीएचयू परिसर को जोड़ने वाली सड़क को घंटे भर को लिए रोक कर प्रधानमंत्री को वहां जाने की व्यवस्था की जा सकती है। फिलहाल प्रधानमंत्री के मंदिर जाने का इरादा जानकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संगतों में खुशी छा गई है। बैठक में एसएसपी आकाश कुलहरि, एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय, नगर निगम, जल संस्थान, लोक निर्माण विभाग और मंदिर के पुजारी मंदीप दास, ट्रस्टी केएल सरोवा भी मौजूद थे।


सतर्कता ः छात्र संगठनों की गतिविधियों पर खुफिया नजर

वाराणसी (ब्यूरो)। जेएनयू विवाद की आंच बनारस पहुंचने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। उसकी अतिरिक्त सतर्कता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस आगमन को लेकर भी है। पीएम 22 फरवरी को बीएचयू के शताब्दी दीक्षांत समारोह और संत रविदास जयंती समारोह में शरीक होंगे। इन कार्यक्रमों में पीएम के विरोध की सुगबुगाहट से पुलिस प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। ऐसे में प्रशासन ने खुफिया एजेंसियों को छात्र संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है।


दरअसल, जेएनयू में पाकिस्तान समर्थित नारे लगने के बाद देश की राजनीति दो खेमों में बंट गई है। देश के दोनों ध्रुव आंदोलन की जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस घटना के विरोध में आंदोलन कर रहा है जबकि आइसा, एसएफआई व एनएसयूआई ने इसे सियासी साजिश बताया है। ऐसे में पीएम के भाषण के दौरान उनके खिलाफ नारे लगाने के साथ छात्र काले कपड़े भी लहराकर सकते हैं। खुफिया एजेंसियों को इस आशय की जानकारी मिली है। इसे ध्यान में रखते हुए पीएम के कार्यक्रम में काले सामानों पर रोक लगाई जा सकती है।
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