कॉमनवेल्थ और दो एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं बास्केटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंह के अर्जुन अवार्ड के लिए चुने जाने की जानकारी मिलते ही काशी में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। बिटिया की कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही बधाइयों की जो शुरुआत हुई, वह शाम तक नहीं थमी।
प्रशांति और उनकी बहनें खेल जगत में सिंह सिस्टर्स के नाम से मशहूर हैं। काशी की प्रशांति यूपी की पहली महिला खिलाड़ी हैं, जिन्हें खेल के क्षेत्र में मिलने वाले बड़े सम्मान अर्जुन अवार्ड के लिए चुना गया है।
गुरुवार को दिल्ली में मौजूद प्रशांति ने मोबाइल पर बातचीत में कहा कि यह अवार्ड उनके परिवार की 25 वर्षों की मेहनत, समर्पण और त्याग का परिणाम है। उन्होंने काशी की माटी और यहां के लोगों के आशीर्वाद को इसका श्रेय दिया।
उधर, प्रशांति के शिवपुर स्थित आवास पर जाकर शुभेच्छुओं, खिलाड़ियों ने उनके माता-पिता के साथ अवार्ड की खुशियां मनाईं। प्रशांति भारतीय महिला बास्केटबाल टीम में 2002 में शामिल हुई थीं। कप्तान के तौर पर वियतनाम में हुए थर्ड एशियन इंडोर गेम्स में सिल्वर मेडल जीता।
फिर सफर का सिलसिला नई सफलताओं के साथ आगे बढ़ता गया। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और फेडरेशन कप में कुल मिलाकर 23 मेडल जीते। प्रशांति इकलौती ऐसी महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा दो बार एशियन गेम्स (2010, 2014) में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
फिलहाल वह एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन की अंतरराष्ट्रीय महिला फिल्म फोरम की सदस्य हैं। प्रशांति के जीवन पर डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘बी क्यूब’(बास्के बास्केटबाल बनारस ) बनी है, जो सत्यजीत रे फिल्म फेस्टिवल की प्रमुख छह फिल्मों में शामिल रही।