अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर प्रकाश उदय की कृति अरज-निहोरा को राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी तथागत सम्मान दिया जाएगा। दिल्ली की तथागत संस्था की ओर से हुई बैठक में शुक्रवार को सर्वसम्मति से ये फैसला लिया गया। प्रो. सदानंद शाही की अध्यक्षता में सम्मान के लिए आई प्रविष्टियों में से प्रकाश उदय की कृति अरज-निहोरा का चयन किया गया। वहीं, भोजपुरी भाषा के शब्दों को सहेजने वाले चंदेश्वर परवाना को भोजपुरी-हिंदी शब्दकोश के लिए विशिष्ट तथागत सम्मान दिया जाएगा।
सम्मान के संयोजक डॉ. गोपाल यादव और डॉ. देवेंद्र तिवारी ने बताया कि प्रकाश उदय को 51 हजार नगद, अंगवस्त्रम् और स्मृति चिह्न दिया जाएगा। वहीं, चंदेश्वर परवाना को 21 हजार नगद, अंगवस्त्रम् और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया जाएगा। भोजपुरी के विकास के लिए इस वर्ष चार कृतियों लाल बहादुर चौरसिया लाल की कृति चुभे लागल बरगत के छांव, आकृति विज्ञा अर्पण की कृति ललमुनिया, राम बचन यादव की कृति अंगूठा कटत हमार बा और प्रतिभा सिंह की कृति जब नेह के धागा टूटेला का लोकार्पण किया जाएगा।
परंपरा को चलाती है भोजपुरी की संवाद शैली
संस्थान के सदस्य मृत्युंजय कुमार सिंह, डॉ. प्रेमशीला शुक्ला, डॉ. जौहर साफियावादी, कमलेश राय और प्रो. उषा कुमारी ने कहा कि प्रकाश उदय की कृति भोजपुरी की संवाद शैली की परंपरा का निर्वहन करने वाली हमारे समय की सशक्त कृति है। उनकी कविताएं प्रचलित सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए नए आयाम को विस्तार देती हैं। संस्था के संरक्षक डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि सम्मान समारोह 21 मार्च को बनारस के बरजी गांव में आयोजित होगा। इसके मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला होंगे।