देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहर में शुमार बनारस के फेफड़ों तक प्रदूषण पहुंच चुका है। सरकारी कवायद के बाद भी वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। पिछले तीन दिनों से शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 के ऊपर है। शनिवार को तो बनारस देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर रहा।
वायु गुणवत्ता में शहर की हालत ठीक नहीं है। शहर के फेफड़ों के रूप में मशहूर बीएचयू, सारनाथ, कैंटोमेंट में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा 400 के ऊपर है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब शहर को आक्सीजन देने वाले फेफड़े भी हांफने लगे हैं। पर्यावरण वैज्ञानिक एक्यूआई के 20 पॉइंट की तुलना एक सिगरेट पीने से करते हैं। ऐसे में आप अपने घर में सिगरेट के धुंऐ से तो बच सकते हैं, लेकिन घर के बाहर न चाहते हुए भी रोजाना 15 सिगरेट जितना धुआं सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचा रहा है। शनिवार रात को बीएचयू का एक्यूआई 413, कैंटामेंट का 400 और सारनाथ का 374 दर्ज किया गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को खिली धूप के कारण एक्यूआई 245 दर्ज किया गया, लेकिन सुबह यह आंकड़ा 300 के ऊपर था। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार हवा में जहरीले तत्वों की मौजूदगी बढ़ गई है। इसमें जल्द सुधार नहीं हुआ तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद से शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार तीन सौ के ऊपर ही बना हुआ है। निर्माण कंपनियां, सरकारी खोदाई, प्रदूषण को नियंत्रण करने वाले अधिकारियों की सुस्ती और खराब वाहनों पर नियंत्रण रखने वाले विभाग सभी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह का कहना है कि शहर में चल रहे निर्माण स्थलों पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। ठंड के कारण प्रदूषक तत्व हवा में नहीं घुल पा रहे हैं, इससे आए दिन पीएम कणों की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है।
जनवरी में देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर बना बनारस
जनवरी में बनारस वाय प्रदूषण के मामले में चार बार पहले नंबर पर रहा, वहीं अधिकांश समय यह टाप टेन की सूची में शामिल रहा। हमारी सांसों और सेहत के लिए यह स्थिति जरा भी ठीक नहीं है। गंभीर यह भी है कि पीएम-10 हो या पीएम-2.5 दोनों की ही स्थिति मानक क्रमश 100 व 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक है।
पीएम 2.5 या इससे छोटे कण अधिक खतरनाक
बीएचयू के वैद्य डॉ. सुशील दुबे ने बताया कि श्वास संबंधी रोगों के लिए पीएम-2.5 व इससे छोटे प्रदूषक कण अधिक खतरनाक हैं। क्योंकि यह सांस लेते समय नाक के बालों में फंसने की जगह सीधे फेफ ड़ों में चले जाते हैं। यह 60 से अधिक नहीं होना चाहिए। इन सबसे बचने के लिए मास्क और भाप लें। तीन लीटर गुनगुना पानी जरूर पीयें। इसके अलावा यदि समस्या आती है तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। मास्क को जरूर पहनें।
उड़ने वाली धूल है जिम्मेदार
पर्यावरणविद एकता शेखर ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार बनारस और लखनऊ में प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार सड़कों और नवनिर्माण कार्य से उडने वाली धूल हैं। वर्तमान में शहर में कई स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा है जबकि लान, हरियाली और पौधरोपण के मानक पूरे नहीं किए जा रहे हैं।
प्रदूषण के कारण 15 दिन में बढ़े तीन गुना श्वांस रोगी
पिछले 15 दिनों से बनारस में श्वांस रोगियों में तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। मंडलीय चिकित्सालय और बीएचयू की ओपीडी रिपोर्ट के अनुसार दोनों अस्पतालों में श्वांस रोग समेत, घबराहट, चक्कर, ह्दय रोग, स्किन डिजीज और डिप्रेशन के मरीजों की संख्या 10-10 से बढ़कर लगभग 30-30 हो गई है।
रात में हालात और खराब
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो रात और भोर में प्रदूषण सबसे अधिक रहता है। रात 8 से लेकर सुबह 8 बजे के बीच हवा में पीएम 2.5 का स्तर आंकड़ों में सबसे उच्चतम स्कोर यानी 500 तक दर्ज किया गया है। यह स्थिति 10-12 घंटे तक लगातार बनी रही।
प्रदूषण के कारण
-शहर की सड़कों पर दौड़ रहे 12 लाख से अधिक वाहन प्रदूषण के बड़े कारण हैं।
-शहर के अंदर हरियाली न होने की वजह से प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
-प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपाय हैं नाकाफी, ठंड बढ़ने से नहीं घुल रहे प्रदूषक तत्व।
-रोक के बावजूद शहर में कई जगहों पर कचरा जला देना।
-निर्माण कार्यों से उठने वाला धूल का गुबार
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प्रदूषण रोकने के सुझाव
-कहीं भी कूड़ा-कचरा न जलाएं और न जलाने दें
-घर के आसपास औरर घर के अंदर पेड़-पौधे लगाकर हरियाली बनाएं
शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स
बौलिया -441
कैंट स्टेशन-427
शास्त्री चौक-423
मंडुवाडीह- 421
अर्दली बाजार-418
तरना-414
बीएचयू-413
पड़ाव-413
पंचक्रोशी-411
मलदहिया-409
चितईपुर-407
आदमपुर-406
भेलूपुर-405
चितरंजन पार्क-397
सारनाथ-374