जिले में सरकारी महकमे के मुताबिक, सबकुछ ठीक चल रहा है, लेकिन प्रदूषण कम करने के लिए एक भी अभियान धरातल पर नहीं चलाए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को शहर का एक्यूआई 161 (अस्वस्थ) तक रहा, जो कि सामान्य से 111 इकाई अधिक था।
शहर में बड़ी-बड़ी मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं और सड़कों को पांच से दस फीट तक खोदकर नई संरचनाओं को आकार दिया जा रहा है। शहर में भले ही विकास का काम तेजी से चल रहा हो, लेकिन इसका दुष्प्रभाव नागरिकों की सेहत पर पड़ रहा है।
इन इलाकों में सबसे अधिक समस्या : लहरतारा, विनायका-बड़ी गैबी मार्ग, कमच्छा-शंकुलधारा, छित्तूपुर, रविंद्रपुरी, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर क्षेत्र, चांदपुर चौराहा, ककरमत्ता फ्लाईओवर, पहड़िया मंडी, सिद्धगिरीबाग, औरंगाबाद, सोनिया, पांडेयपुर, पुलिस लाइन–कचहरी रोड और मंडुआडीह सहित कई इलाकों में स्थिति खराब है।
प्रदूषण रोकने के लिए नहीं हुई कार्रवाई
प्रदूषण रोकने के मानकों के अनुसार, निर्माणस्थल पर लगातार पानी का छिड़काव और प्लास्टिक कवर से घेराबंदी जरूरी है, लेकिन शहर में अधिकांश जगह इन नियमों का पालन होता हुआ नज़र नहीं आ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर में प्रदूषण रोकने के लिए विभाग तो मौजूद है, अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं, लेकिन धूल और धुएं की इस विकराल समस्या पर कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदूषण विभाग के ओर से हवा शुद्ध रखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। विकास कार्यों वाले स्थलों पर धूल कम करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इसके अलावा यदि कहीं प्रदूषण की शिकायत आती है, तो वहां अभियान चलाने का प्रयास किया जाएगा। - रोहित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक