मुट्ठी भर उपद्रवियों ने बीएचयू जैसे विशाल कैंपस में दो घंटे तक बेखौफ तांडव मचाया लेकिन उनसे कई गुना अधिक तादाद में पुलिस-पीएसी फोर्स और विश्वविद्यालय प्रशासन के सुरक्षाकर्मी। सिंहद्वार पर पुलिस-पीएसी बवाल शुरू होने से पहले ही मुस्तैद हो गई थी।
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लिहाजा, उपद्रवी छात्र चाहकर भी लंका चौराहे या फिर बाजार की तरफ जाने का साहस नहीं कर पाए और मेन गेट पर तोड़फोड़ करते हुए परिसर का रुख कर लिए। इसके बाद तो अराजकता और दहशत के बीच हर कोई बस यही चाह रहा था कि जल्द से जल्द पुलिस फोर्स कैंपस में दाखिल हो जाए और माहौल शांत हो जाए।
लेकिन, सिंहद्वार पर शाम चार बजे से पहले से मुस्तैद फोर्स विश्वविद्यालय प्रशासन के बुलावे का इंतजार करती रह गई। एक ओर जहां उन्हें बुलावे का इंतजार था वहीं अंदर घटना को लेकर फंसे मरीजों-तीमारदारों, शिक्षकों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और परीक्षा देने आए छात्र-छात्राओं को इस बात की कसक रही कि पुलिस कर्मी आखिर अंदर क्यों नहीं आ रहे...।
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अच्छा! तो ये था कारण
दो घंटे तक मचता रहा ताडंव, अंदर नहीं पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, बीते 23 सितंबर की रात बीएचयू में बवाल के दौरान पुलिस ने एकबारगी स्थिति नियंत्रित कर ली थी लेकिन तब प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने वीसी लॉज के पास छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज कर माहौल को हिंसक बना दिया था। इसके बाद पुलिस पर भी छात्राओं को लाठी से पीटने के आरोप लगे।
जब मामले की जांच शुरू हुई कि लाठीचार्ज का जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन है या पुलिस तो उस समय भी सारा दोष पुलिस पर ही मढ़ने की कोशिश हुई थी। सूत्रों की माने तो उस मामले को लेकर ही पुलिस इस बार सबक लेती दिखी।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक बीएचयू गेट पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को उच्चाधिकारियों का निर्देश था कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिखित या मौखिक मदद नहीं मांगी जाती या फिर कैंपस में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक फोर्स परिसर में दाखिल नहीं होगी।
हुआ भी यही, बीएचयू की ओर से कोई मदद नहीं मांगी गई और फोर्स गेट पर विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति का इंतजार करती रही।
सीएम का आदेश भी भूल गए अधिकारी
सीएम योगी आदित्यनाथ
जबकि, सीएम योगी आदित्यनाथ का निर्देश है कि बड़ी हिंसक घटनाएं हों तो डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे लेकिन जिले के दोनोें उच्चाधिकारी भी बीएचयू नहीं पहुंचे। इस बारे में पूछे जाने पर एसएसपी ने किसी तरह के गतिरोध से इनकार किया। कहा कि बीएचयू गेट पर पर्याप्त फोर्स तैनात थी और परिसर के अंदर लंका एसओ मौजूद थे।
बीएचयू में इस साल तक की बड़ी घटनाएं
02 फरवरी: विश्वनाथ मंदिर के पास बीएससी कृषि छात्र की पिटाई के बाद तोड़फोड़,चक्का जाम
18 फरवरी: लंका सिंह द्वार पर छात्रों-दुकानदारों के बीच मारपीट के बाद बवाल
07-08 अप्रैल: भारतेंदु और राजाराम हॉस्टल के छात्रों के बीच मारपीट। हवाई फायरिंग, हॉस्टल में तोड़फोड़
08 सितंबर: कला संकाय में छात्रा के साथ रैगिंग के बाद दो हॉस्टल छात्रों के बीच बवाल, पत्थरबाजी, आगजनी।
23 सितंबर: छात्रा से छेड़खानी, लाठीचार्ज के बाद पत्थरबाजी, आगजनी।
बीते सितंबर महीने की तरह ही लंबे समय के लिए बीएचयू परिसर का माहौल एक बार अशांत करने की तैयारी थी। सर्विलांस की मदद से पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है।
उच्चाधिकारियों के अनुसार, एससी-एसटी वर्ग के छात्र की पिटाई कर आरोप प्राक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों पर मढ़ने की थी। इसी बहाने परिसर में छात्र हित की आड़ में फिर से धरना-प्रदर्शन शुरू करने की तैयारी थी।
यह योजना आशुतोष के ही निर्देशन में बनाई गई थी लेकिन राज खुलने के चलते उपद्रवी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि लंका थानाध्यक्ष को सिंह द्वार से नरिया गेट तक और विश्वनाथ मंदिर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
फुटेज के आधार पर उपद्रवी छात्रों को चिह्नित किया जाएगा। रात एक बजे तक नौ छात्रों को चिह्नित कर उनकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें बनाई गई हैं। एहतियातन परिसर के मुख्य द्वार और नरिया गेट पर फोर्स तैनात है।