फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi: कैंसर संस्थान के कर्मचारी डॉक्टर को जल्दी दिखाने के लिए लेते थे पैसे, जांच में खुली पोल; FIR दर्ज

Mon, 05 Feb 2024 01:43 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कैंसर संस्थान के कर्मचारियों के खिलाफ मरीज ने शिकायत की थी। जिसके बाद जांच में भी धोखाधड़ी सामने आई। मामले में मुख्य सुरक्षाधिकारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने की  कार्रवाई हुई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान सुंदरपुर में तैनात कर्मचारियों पर मरीजों को डॉक्टर को दिखाने, आर्थिक सहायता दिलाने के नाम पर जालसाजी करने के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। मामले की जांच शुरू हो गई हैं।

विज्ञापन


कैंसर संस्थान में तैनात मुख्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार सिंह की तहरीर पर चितईपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। तहरीर में मुख्य सुरक्षाधिकारी ने बताया कि 12 दिसंबर को मऊ के कोपागंज दोस्तपुरा निवासी मुन्ना चौरसिया ने संस्थान में कार्यरत कर्मचारी पवन कुमार सिंह, राजकुमार और आलोक कुमार पर जालसाजी करने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत की। प्रथम दृष्टया संस्थान के स्तर पर हुई जांच में यह जालसाजी उजागर हुई। 

इसमें पता चला कि कानपुर के रतनपुर कॉलोनी के रहने वाले आलोक कुमार ने अस्पताल में मरीजों को चिकित्सक को दिखाने के लिए अपॉइंटमेंट की सुविधा दिलाने के लिए धोखाधड़ी की थी। इसके अतिरिक्त बी केयर फाउंडेशन के एक कर्मचारी द्वारा मरीज से रिश्वत लेकर आर्थिक सहायता दिलाने की शिकायत भी मरीज ने की थी। 
विज्ञापन


मरीज की शिकायत पर अस्पताल प्रशासन द्वारा विभागीय जांच शुरू की गई। इसमें मरीज द्वारा बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग, बैंक से लेनदेन की दी गई पर्चियों की जांच की गई। जांच में अस्पताल के कर्मचारी पवन कुमार सिंह, बी केयर फाउंडेशन के कर्मचारी राजकुमार और आलोक कुमार का नाम उजागर हुआ है। थानाध्यक्ष चितईपुर चंद्रदीप कुमार ने बताया कि मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर आरोपी कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज की गई है।

कुछ और नाम आ सकते हैं सामने
अस्पताल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि अस्पताल के कुछ और कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं। मरीजों ने जो शिकायत की है, उसमें अस्पताल में कार्य कर रहे धर्मार्थ संगठन के नाम पर जालसाजी करने का मामला सामने आया है। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस भी कुछ लोगों से पूछताछ कर सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें