नारेबाजी-परिसर विभाजनकारी राजनीति का बना प्रयोगशाला
एबीवीपी के छात्रों ने एमएमवी तिराहे पर पुतला फूंका। एबीवीपी के प्रांत मंत्री अभय सिंह ने कहा कि बीएचयू की पूरी प्रवेश प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण की अनियमितता दूर की जाए। विवि प्रशासन की शह पर परिसर विभाजनकारी राजनीति का प्रयोगशाला बन गया है।
मांग रखी कि भारत सरकार के ईडब्ल्यूएस संबंधित नियम के अनुसार छात्र हित में फैसला हो। जो बाहरी राजनैतिक और अवांछनीय लोग इन मुद्दों को भुनाने के लिए कैंपस को शिक्षा विरोधी राजनीतिक अड्डा बना रहे हैं, उससे कैंपस का वातावरण खराब हो रहा है। प्रशांत सिंह, सर्वेश सिंह समेत 50 छात्रों ने नारेबाजी भी की।
बीएचयू में 5 दिन पहले हिंदी विभाग में पीएचडी प्रवेश के लिए अर्चिता सिंह ने सेंट्रल ऑफिस के बाहर धरने की शुरुआत की थी। जिस पर आरोप लगाया, दो दिन बाद वह छात्र भास्करादित्य त्रिपाठी भी कुलपति आवास के सामने धरने पर बैठ गया। तीन दिन पहले तीसरा धरना परीक्षा नियंता कार्यालय के बाहर शुरू हो गया।
तीनों अभ्यर्थियों की मांग
अर्चिता सिंह - पांच दिन से सेंट्रल ऑफिस के बाहर धरना। हिंदी विभाग में ईडब्ल्यूएस आरक्षण सर्टिफिकेट देर में जमा करने पर प्रवेश न देने का मामला। हालांकि अंडरटेकिंग सर्टिफिकेट पहले जमा किया था। कहा ये पहला संघर्ष है। इन विषम परिस्थितियों में घबराने के बजाय न्याय की लड़ाई मजबूती से लड़ने का काम करती रहूंगी।
भास्करादित्य त्रिपाठी - तीन दिन से वीसी लॉज के बाहर धरनारत। आरोप- हिंदी विभाग में नियम के तहत प्रवेश नहीं मिल रहा है। कहा- विश्वविद्यालय प्रशासन और हिंदी विभाग की मिलीभगत से एडमिशन बाधित करने के विरोध में तीखी धूप में बैठा हूं।
कुणाल गुप्ता - तीन दिन से परीक्षा नियंता कार्यालय के बाहर धरना। प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग में ओबीसी सीट पर प्रवेश न मिल पाने का आरोप है। कहा- सामाजिक न्याय पसंद लोगों से अपील है कि आरक्षण और संविधान पर हमले के खिलाफ लड़ाई में साथ दें।