द्विपक्षीय वार्ता के दौरान बनारसी तबले, सितार और सारंगी की धुन पर बनारसी दादरा, चैती और धुन सजा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा बनारस घराना सबसे समृद्ध है। बनारस घराने ने बनारस में मॉरीशस का माहौल बना दिया।
भारत और मॉरीशस के बीच पहली बार बनारस में हुई द्विपक्षीय वार्ता ने हर किसी को बनारस घराने के संगीत का मुरीद बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और उनकी पत्नी बीना भी बनारस के तबले, सितार और सारंगी की युगलबंदी ने बनारस में मॉरीशस का अहसास कराया।
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होटल ताज में बृहस्पतिवार को बनारस घराने के सितारवादक डॉ. अंकुर मिश्रा, तबलावादक पं. अभिषेक मिश्रा और सारंगी वादक विनायक सहाय ने वादन की शुरुआत राग शुद्ध सारंग तीन ताल में की। इसके बाद राग मियां मल्हार में चार ताल, तीन ताल में झाला के बाद राग चारुकेशी बजाया। सबसे खास प्रस्तुति मॉरीशस के गीतों की रही। सितार, तबले और सारंगी पर मॉरीशस गीतों की धुन के माधुर्य ने तो सभी के अंतर्मन को झंकृत कर दिया।
कलाकारों ने बनारसी दादरा, चैती के बाद बनारसी धुन डगर बीच कैसे चलूं... बजाकर संगीत की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। वहीं, मेहमानों को अपनी कला का दीवानाा भी बना दिया। बनारस घराने के संगीत का आलम यह था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलाकारों का हाथ पकड़कर कहा कि आज आप लोगों ने बनारस में तो मॉरीशस का माहौल बना दिया। उन्होंने मॉरीशस के प्रधानमंत्री को बनारस घराने की समृद्ध विरासत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यहां पर संगीत की सभी विधाएं मिलती हैं। मॉरीशस के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी ने भी कलाकारों की सराहना की।