प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होने जा रहे हैं। भाजपा के लिए यहां की आठ सीटें नाक सवाल बन गई हैं। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने तीन दिन तक यहां चुनाव प्रचार और रोड शो किया था।
वहीं सीएम अखिलेश व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जोड़ी ने जोरदार रोड शो कर अपनी ताकत का अहसास कराया था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कई रैलियां कर शक्ति प्रदर्शन किया था। पेश है बनारस की आठों सीटों का हाल और वहां जीत की संभावनाओं का लेखा जोखा -
पिंडरा
पिंडरा विधानसभा में इस बार साइलेंट वोटर कमाल दिखाएंगे। सुबह से शाम तक मतदाताओं ने चुप्पी की चादर इस कदर तानी कि उम्मीदवार भी हार-जीत का आकलन करते रहे लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। सियासी रणनीतिकारों की मानें तो यहां कांटे के मुकाबले में हार-जीत का अंतर कम होगा।
सवर्ण वोट भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन में बंटे हैं तो पटेल वोट भाजपा और बसपा के खाते में बंटे हैं। यादव और मुस्लिम वोट कांग्रेस-सपा गठबंधन के खाते में जाने की बात कही जा रही है। पिंडरा सीट पर वर्तमान विधायक और कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी अजय राय, भाजपा के डॉ. अवधेश सिंह और बसपा के बाबूलाल पटेल के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
फूलपुर, पिंडरा कठिरांव, सिंधोरा, बाबतपुर, मंगारी, बड़ागांव आदि क्षेत्रों में सुबह से ही वोटर घरों से निकलने लगे थे। दोपहर में धूप चढ़ी तो वोटिंग का प्रतिशत थोड़ा कम हुआ लेकिन तीन बजे तक 52.84 फीसदी लोग वोट डाल चुके थे। कुछ बूथों पर भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन के बीच सीधी लड़ाई रही तो कुछ बूथों पर भाजपा और बसपा टक्कर लेते दिखे।
शिवपुर : 2012 की तुलना में एक फीसदी बढ़ा मतदान प्रतिशत
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शिवपुर सीट पर भी लड़ाई रोमांचक है। यहां भाजपा-बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। बुधवार सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक इलाके के मतदान केंद्रों पर वोटरों की कतारें लगी रहीं। लोग मतदान के लिए उत्साहित दिखे।
मतदाताओं के मिजाज देखकर रणनीतिकारों का आकलन है कि कुछ बूथों पर भाजपा और बसपा आमने-सामने हैं, कुछ पर बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन में टक्कर हुई तो कहीं भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशियों में लड़ाई है। शहरी सीमा से सटे इस विधानसभा क्षेत्र में शहरियों की अपेक्षा ग्रामीणों में मतदान के प्रति अधिक उत्साह दिखा।
महेशपुर, लोहता, चांदपुर आदि बूथों पर तो सुबह मतदान शुरू होने से पहले ही कुछ लोग पहुंच गए थे जिन्होंने मतदान प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार किया। हालांकि कई बूथों पर नौ बजे के बाद मतदान में तेजी आई।
गांवों में कई लोग ऐसे भी दिखे जिन्होंने पूरे परिवार संग पहले मताधिकार का प्रयोग किया, इसके बाद ही बाकी काम किए। लोहता इलाके के मतदान केंद्रों पर मुस्लिम मतदाताओं की लंबी लाइनें सुबह से दोपहर बाद तक लगी रहीं।
सेवापुरी : गठबंधन आमने-सामने, बसपा भी कमतर नहीं
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मिर्जापुर और भदोही जिले की सीमा से सटे सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में इस बार कांटे की लड़ाई है। कई इलाकों मे सीधा मुकाबला भाजपा-अद (एस)-भासपा गठबंधन प्रत्याशी नीलरतन सिंह पटेल और सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी सिटिंग विधायक सुरेंद्र पटेल के बीच दिखा।
वहीं, कई स्थानों पर कांटे की लड़ाई का माहौल दोनों गठबंधन दलों और बसपा प्रत्याशी के बीच दिखाई दिया। हालांकि जीत को लेकर फिलहाल अभी सबके अपने-अपने दावे और समीकरण हैं लेकिन सेहरा किसके सिर बंधेगा इसका पता 11 मार्च को मतगणना के बाद ही लग पाएगा।
सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में 3,18,310 मतदाताओं को 178 मतदान केंद्र के 317 बूथ पर 15 प्रत्याशियों में से अपना प्रतिनिधि चुनना था। चुनाव की घोषणा के बाद से ही सेवापुरी सीट से सपा-कांग्रेस गठबंधन के सुरेंद्र पटेल और भाजपा-अद (एस)-भासपा गठबंधन के नीलरतन पटेल के बीच मुख्य लड़ाई मानी जा रही है।
दोनोें 2012 विधानसभा चुनाव में भी एक-दूसरे के आमने-सामने थे जिसमें सुरेंद्र को जीत मिली थी। वहीं, पहली बार चुनाव लड़ रहे बसपा के महेंद्र नाथ पांडेय को भी पार्टी के परंपरागत और ब्राह्मण वोटों के चलते कमतर नहीं आंका जा रहा है।
रोहनिया : बसपा बूथों पर जूझती नजर आई
सतीश चंद्र मिश्रा
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रोहनिया विधानसभा में मतदाता इस बार चौंकाने वाला परिणाम होगा। इस सीट पर सपा और भाजपा के बीच बूथों पर सीधी टक्कर दिखी तो बसपा भी अपने परंपरागत वोटों के सहारे खूब जददेजहद करती रही। वहीं दूसरी बार चुनाव मैदान में भाग्य आजमा रही अपना दल ने भी चुनाव में दमखम दिखाया है।
यहां वर्तमान विधायक और सपा-कांग्रेस के प्रत्याशी महेंद्र सिंह पटेल और भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र नारायण सिंह औढ़े के बीच कई बूथों पर सीधा मुकाबला दिखा। पटेल बाहुल्य इलाके में पटेल मतदाता कई मतदान केंद्रों पर बंटे नजर आए। सपा के साथ भाजपा के साथ भी खड़ूे नजर आए।
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि पटेल और मुस्लिम मतदाता इस विधानसभा में निर्णायक हो सकते हैं। यहां इस पर उलटफेर हो सकता है। वहीं बसपा प्रत्याशी सीए प्रमोद सिंह परंपरागत दलित वोटों के साथ अपनी बिरादरी और मुस्लिम मतों पर भरोसा कर बूथों पर लड़े हैं।
अपना दल की कृष्णा पटेल ने भी पूरे दमखम दिखाया है। विधानसभा में 379161 मतदाताओं में पुरुष मतदाता 211971 और महिला 167168 मतदाताओें के लिए 161 मतदान केंद्रों पर 372 बूथ बनाए गए थे। विधानसभा में 60.79 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। शाम पांच बजे प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में कैद हो गए।
अजगरा : त्रिभुवन राम के लिए सीट बचाना होगी बड़ी चुनौती
BSP SP FLAG
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अजगरा विधानसभा में इस बार सिटिंग विधायक एवं बसपा प्रत्याशी त्रिभुवन राम के लिए सीट बचाना कड़ी चुनौती होगी। इस बार सपा के लालजी सोनकर और भासपा के कैलाश सोनकर की मजबूत दावेदारी है। कुछ बूथों पर सपा के लालजी मजबूत दिखे तो कुछ बूथों पर कैलाश तो कुछ पर त्रिभुवन राम आगे रहे।
ये तीनों प्रत्याशी अपनी-जीत जीत के दावे कर रहे हैं। बहरहाल किसके दावे में कितना दम है ये तो 11 मार्च को ही पता चलेगा। कैलाश सोनकर की जीत से केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय की प्रतिष्ठा भी जुड़ी है। अजगरा विधानसभा चंदौली लोकसभा के तहत आता है और महेंद्रनाथ पांडेय चंदौली के सांसद है।
भाजपा-भासपा गठबंधन में यह सीट भासपा को दी गई है। बुधवार को कुछ मतदान केंद्रों पर सुबह से ही भीड़ रही तो कुछ पर दोपहर बाद से भीड़ शुरू हुई। वहीं कुछ मतदान कें द्रों पर केवल एक ही बूथ बनाए गए थे जिस वजह से बूथों पर ज्यादा भीड़ रही।
अजगरा विधानसभा के प्राथमिक विद्यालय परागडीह में एक बूथ बनाया गया था। यहां 916 वोटर थे जो पूरे दिन वोट देने के लिए आते रहे। वहीं प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर में दिन में साढ़े ग्यारह बजे मतदाताओं की लाइन लगी थी। कार्मिकों के लिए विद्यालय में ही भोजन बन रहा था।
कैंट : गठबंधन पर अल्पसंख्यक वोटरों ने जताया भरोसा
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कैंट विधानसभा के चुनावी रणक्षेत्र में बुधवार को सीधी टक्कर देखने को मिली। इन क्षेत्रों से जो रुझान मिल रहे हैं उनसे यह स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा और सपा गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। जीत का अंतर भी बहुत कम होगा। वहीं बसपा के परंपरागत वोटरों ने एक बार फिर अपनी पार्टी पर पूरा भरोसा जताया है।
जहां भाजपा खेमे को ‘मोदी इफेक्ट’ का फायदा मिला है तो वहीं मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में सपा-कांग्रेस गठबंधन पर जमकर वोट बरसे। जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा यह तो 11 मार्च को स्पष्ट हो जाएगा। वाराणसी खासकर शहर की तीन विधानसभा सीटों पर पूरे देश की नजर है।
बुधवार को कैंट विधानसभा के प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में कैद हो गए। हर प्रत्याशी खुद की जीत को लेकर दावे कर रहा है। जो भी हो पर कैंट विधानसभा क्षेत्र पर पिछले छह बार से अपना कब्जा जमाती आ रही भाजपा को सपा-कांग्रेस गठबंधन से कड़ी टक्कर मिली है।
इस बार जहां गठबंधन को सपा और कांग्रेस के अपने परंपरागंत वोट बैंक का साथ मिला ही तो वहीं मुस्लिम मुहल्लों जैसे बजरडीहा, मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, शिवाला, गौरीगंज में सबसे ज्यादा बटन ‘पंजा’ पर दबाए गए। मुख्यमंत्री अखिलेश और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल के रोड शो का असर भी नजर आया।
दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो और पक्का मोहाल (टाउनहाल) तथा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में जनसभा का फायदा भाजपा को मिला। यही कारण रहा की रामनगर, अस्सी, भदैनी, मलदहिया, सिगरा, महमूरगंज में कमल मजबूत स्थित में नजर आया।
बुद्धिजीवी वर्ग में भी मोदी का जादू सिर चढ़कर बोला। सामनेघाट, बीएचयू, लंका आदि क्षेत्रों में भी भाजपा की झोली में खूब वोट गिरे। वहीं बहुजन समाज पार्टी के परंपरागत वोटरों ने अपनी बसपा का पूरा साथ दिया।
अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में बसपा को भी कुछ वोट मिले पर जितनी उम्मीद जताई जा रही थी वैसा नजारा नही दिखा। भाजपा के लिए ‘नाक’ बन चुकी शहर की सीटों में से एक कैंट पर किस पार्टी का झंडा लहराएगा यह 11 मार्च को स्पष्ट होगा।
शहर उत्तरी : मुस्लिम इलाकों में मतदान केंद्रों में जबरदस्त रही भीड़
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विधानसभा शहर उत्तरी में बुधवार को हुए मतदान में भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन में आमने सामने टक्कर नजर आई, हालांकि बसपा ने भी अपने परंपरागत वोटों से अपनी जगह बनाए रखी है। जानकारों की मानें तो पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी हार जीत में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होगा।
इस बार सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर एकतरफा वोट का रुझान ज्यादा नजर आया, हालांकि प्रधानमंत्री के रोड शो का भी अच्छा खासा असर मतदाताओं पर देखने को मिला। सभी पार्टियां अपनी अपनी जीत का दावा कर रही हैं लेकिन जीत किसके हाथ लगेगी इस फैसला तो 11 को होगा।
बुधवार को शहर उत्तरी में हुए विधानसभा चुनाव में वोटिंग के लिए झूम कर मतदाता निकले। मुस्लिम इलाकों के मतदान केंद्रों पर मुस्लिम मतदाताओं की जबरदस्त भीड़ थी। प्राथमिक विद्यालय माता प्रसाद से लेकर, सरैया में मदरसा इस्लामिया में सैकड़ों मतदाता लाइन में लगे नजर आए।
हालांकि सदर तहसील, जेपी मेहता इंटर कालेज, सनबीम वरुणा में मतदाताओं के आने की रफ्तार कम थी। सारनाथ के महाबोधि इंटर कालेज और तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय में भी मतदाता कम ही नजर आए। उदय प्रताप इंटर और डिग्री कालेज दोनों में ही मतदाताओं की लंबी कतार नजर आई।
सुबह मतदान जिस रफ्तार से शुरू हुआ, वही रफ्तार अंतिम दौर तक चारी रहा। सुबह नौ बजे 12 फीसदी वोटिंग हुई तो दो घंटे में ये प्रतिशत 24.97 तक पहुंचा। वहीं दोपहर एक बजे 37.94, तीन बजे 49.88 और शाम पांच बजे तक 59.45 फीसदी वोटिंग हुई।
शहर दक्षिणी : काशी के हृदय में कांटे की जंग
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काशी के हृदय प्रदेश शहर दक्षिणी में तीन दशक के बाद भाजपा के ‘विजय रथ’ को रोकने के लिए कांग्रेस-सपा गठबंधन ने एकजुटता दिखाई है। दक्षिणी में हुई कांटे की टक्कर में ‘मोदी लहर’ को लेकर जहां पहली बार युवा और महिला मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह दिखा ।
वहीं मुसलिम बहुल इलाकों में कांग्रेस-सपा गठबंधन ने अपनी होड़ दिखाने में कसर नहीं छोड़ी। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन में सीधा मुकाबला से इनकार नहीं किया जा सकता। दशाश्वमेध तीर्थ से बाबा विश्वनाथ, कालभैरव से महाप्रभु वल्लभाचार्य की पीठ होते हुए कोनिया तक कहीं कमल किला, तो कहीं पंजा चला।
मतों की रेस में हाथी पीछे-पीछे दौड़ता रहा। शहर दक्षिणी में इस बार वोटों की आंधी चली है। सुबह सात बजे ही हर सुंदरी धर्मशाला, विश्वनाथ सनातन धर्म इंटर कॉलेज, सनातनधर्म इंटर कॉलेज के बूथों पर मतदाताओं की कतारें लग गईं।
बाजार बंद होने की वजह से सड़कों पर सिर्फ मतदाताओं की भीड़ नजर आने लगी। दोनों दलों के पोलिंग एजेंटों की चौकियों पर समर्थकों का जमावड़ा उनके उत्साह को जताता रहा।