वाराणसी। प्रधानमंत्री के नाम से आदर्श नरेंद्र दामोदर दास मोदी जनकल्याणकारी ट्रस्ट बनाकर फर्जीवाड़ा करने के मामले में सात आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। हालांकि शनिवार को पुलिस की अलग-अलग टीमों ने बनारस से बलिया तक दबिश दी। नामजद आरोपियों के संबंध में पुलिस उनके करीबियों से भी पूछताछ कर रही है। साथ ही ट्रस्टी अजय पांडेय के पास से मिली सात लोगों की मार्कशीट, दर्जन भर चेक और ट्रस्ट के नाम से खोले गए बैंक खातों की जांच कराई जा रही है। जल्द ही पुलिस ट्रस्ट के बैंक खातों को फ्रीज कराएगी। गौरतलब है कि इस प्रकरण में ट्रस्टी, उसके चाचा और एक दोस्त को गिरफ्तार कर शुक्रवार को जेल भेजा गया था।
दुर्गाकुंड क्षेत्र के कबीर नगर स्थित दयाल टॉवर निवासी अजय पांडेय ने खुद को ट्रस्टी और नौ लोगों को सदस्य दर्शा कर फर्जी कागजात की मदद से 14 जुलाई को उप निबंधक कार्यालय सदर द्वितीय के यहां से प्रधानमंत्री के नाम से ट्रस्ट रजिस्टर्ड कराया था। इसके बाद उसने आदर्श नरेंद्र दामोदर दास मोदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पिंडरा क्षेत्र में 190 बीघा जमीन की मांग लेकर डीएम को धमकी भरे लहजे में चिट्ठी भेजी। डीएम कौशल राज शर्मा ने जांच कराई तो अजय के फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। डीएम के निर्देश पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कर कैंट थाने की पुलिस ने अजय, उसके चाचा रविंद्रनाथ पांडेय और दोस्त शाहबाज खान को गिरफ्तार किया। इस प्रक्ररण में पुलिस को अभी अविनाश सिंह, रंजीता सिंह, अनिल, प्रिया श्रीवास्तव, विकास मिश्रा, सोनू गुप्ता और प्रदीप कुमार सिंह की तलाश है।
निबंधक कार्यालय रहता सतर्क तो न होता फर्जीवाड़ा, होगी पूछताछ
कैंट थाने की पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार तीनों आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि यदि उप निबंधक कार्यालय सदर द्वितीय के स्तर से सतर्कता बरती जाती तो फर्जीवाड़ा न हो पाता। प्रधानमंत्री का नाम और फोटो इस्तेमाल होने के बावजूद निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च स्तर तक के अधिकारी आंख मूदे रहें और अजय ट्रस्ट को रजिस्टर्ड कराने में सफल रहा। पुलिस के अनुसार, इस फर्जीवाड़े को लेकर उप निबंधक कार्यालय सदर द्वितीय के संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जाएगी कि आखिरकर उन्होंने बगैर सत्यापन के ही प्रधानमंत्री के नाम पर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन किस आधार पर किया। तफ्तीश में जिन भी कर्मचारियों और अधिकारी की संलिप्तता उजागर होगी, उनका नाम भी इस प्रकरण को लेकर दर्ज मुकदमे में शामिल किया जाएगा। वहीं, यह फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद उप निबंधक कार्यालय सदर द्वितीय के कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है।
अजय जाता था कलेक्ट्रेट तो देता था धौंस
अजय हाल के दिनों में अक्सर कलेक्ट्रेट भी जाता था। उसके साथ खुद को पत्रकार बताने वाले रवींद्रनाथ और शाहबाज के अलावा बीएचयू के भी एक-दो लोग साथ रहते थे। यह सभी कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों को ट्रस्ट के नाम की धौंस देते थे। स्नातक पास अजय इतने गुरूर में रहता था कि उसे लगता था कि उसका फर्जीवाड़ा किसी की पकड़ में नहीं आ पाएगा। इसी चक्कर में वह विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन की खातिर जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजने के साथ ही फोन भी करता रहता था। हालांकि जिलाधिकारी ने अजय का फर्जीवाड़ा पकड़ लिया और जांच करा कर उसे जेल की सलाखों के पीछे भिजवा दिया। उधर, शनिवार को अजय की गिरफ्तारी के बाद दयाल टॉवर में उसके पड़ोसियों में उसे लेकर खासी चर्चा रही। सभी का कहना था कि आरओ बेचने का काम करने वाला अजय इतना बड़ा जालसाज निकलेगा, यह किसी ने सोचा भी नहीं था।