पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सत्कार उत्सव में होंगे काशी के कला संस्कृति के दर्शन
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अद्भुत, अविस्मरणीय और अलौकिक...। अतिथि देवो भव: परंपरा का पालन करने वाली काशी अपनी वैभवशाली सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत के साथ गंगा घाटों पर सत्कार उत्सव की साक्षी बनने जा रही है। कला-संस्कृति और परंपराओं के वैभव और सौंदर्य के बीच काशी के गंगा तट पर भारत और फ्रांस की दोस्ती की नई चमक सोमवार को दुनिया के सामने होगी।
घाटों के महलों, मढ़ियों, सीढ़ियों से गंगा पार रेती तक उत्सव के रंग कुछ इस तरह छा गए हैं, जैसे काशी देवदीपावली मना रही हो। बेहद खूबसूरती से सजाए गए अर्द्धचंद्राकार घाटों पर विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य और कला की झलकियां हैं तो संत कबीर, तुलसीदास के साथ तथागत बुद्ध और महाबीर स्वामी के संदेशाकी विरासत भी।
नयनाभिराम उत्सव की अगुवाई के लिए अस्सी घाट फूलों-पताकाओं से सजा है। अस्सी घाट और यहां से दशाश्वमेध घाट के बीच नजारा अनूठा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सत्कार में हर घाट पर स्वागत का अनूठा रंग देखने को मिलेगा और गंगा की लहरों की तरह यह आगे की ओर बढ़ती जाएगी।
स्वागत समारोह के साथ काशी की कला-संस्कृति का दर्शन भी होगा। इस नयनाभिराम उत्सव के लिए फूलों-पताकाओं से सज रहा अस्सी घाट वैदिक संस्कृति की अगुवाई करेगा।
बरगद के पेड़ पर महादेव के डमरू की कई प्रतिकृति यहां लगाई गई है। घाट पर तिलक-पुष्प वर्षा के साथ शहनाई वादन होगा। यहीं नाटी इमली के विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप की पालकी रखी गई है, जो काशी की सांस्कृतिक धरोहर का नेतृत्व करेगी।
पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सत्कार उत्सव में होंगे काशी के कला संस्कृति के दर्शन
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अमर कवि तुलसीदास ने जिस घाट पर कभी रामचरित मानस की रचना की थी, उसी तुलसी घाट पर रामलीला का मंचन होगा। सुंदर कांड का पाठ होगा। तुलसी घाट को रामायण के मंच की तरह सजाया जा रहा है। यहां अखाड़ों पर मर्दानियां जोर-आजमाइश करती दिखेंगी।
आगे बढ़ने पर प्रभु घाट पर पूरे विश्व में अहिंसा की अलख जगाने वाले महात्मा गौतम बुद्ध के सारनाथ में दिए उपदेश की झलक ‘बुद्ध मुक्ति देवे नहीं’ के सात मिनट का मंचन में देखने को मिलेगी।
पारंपरिक बौद्ध प्रार्थना के स्वर भी सुनाई देंगे। इस घाट को बौद्ध धर्म के पारंपरिक रूप में सजाया गया है। जैन घाट पर महावीर की आदमकद कटआउट शांति का संदेश देगा।
इसके आगे काशी की सतरंगी छटा होली के रूप में दिखेगी। मयूर नृत्य के साथ फूलों और रंगों की वास्तविक रंग काशी के सौहार्द का प्रतीक बनेंगे। मानसरोवर घाट पर कबीर के भजन, उनके दोहे और साखी की सुमधुर वाणी का फकीराना व सूफियाना अंदाज भी होगा।
वहीं बबुआ पांडेय घाट पर कथक नृत्य की मनोरम छटा निहारेंगे। घाट के अंतिम पड़ाव पर काशी अपने पुराने स्वरूप में नजर आएगी। दशकों पहले के काशी के स्वरूप से अतिथि को रूबरू कराया जाएगा।
एक ओर जहां घाट फूल-माला और पताकाओं से सजे हैं, वहीं गंगा पर रेती पर भारत के साथ फ्रांस के लगे झंडे दोनों देशों की निकटता का संदेश दे रही है। अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक स्कूली बच्चे भारत और फ्रांस के झंडों को हाथों में लेकर मेहमानों का स्वागत करेंगे।
अस्सी घाट
अस्सी घाट वैदिक संस्कृति की अगुवाई करेगा
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अस्सी घाट पर 121 ब्राह्मण स्वस्ति वाचन करेंगे। इसके अलावा सुबह-ए-बनारस के मंच पर 21 शहनाई वादक मंगल ध्वनि तो हरियाणा के कलाकार बीन डांस की प्रस्तुति देंगे। घाट के उत्तरी छोर पर डमरुओं का नाद होगा और बटुकों का समूह शंखनाद कर अतिथियों का स्वागत करेगा। मौनी बाबा राम लीला कमेटी की ओर से भरत मिलाप की झांकी सजेगी। इसमें राम दरबार की झांकी आकर्षण का केंद्र होगी।
तुलसी घाट
तुलसी घाट पर लगा मोदी-मैक्रों का कटआउट
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घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर श्रीरामचरितमानस की गायन मंडली राम राज्याभिषेक प्रसंग से जुड़ी चौपाइयों का गान करेगी। ठीक पीछे घाट की सीढ़ियों पर बने मंच पर श्रीराम दरबार का स्वरूप तैयार किया गया है। घाट के दक्षिणी छोर की सीढ़ियों पर छात्राओं का समूह दोनों नेताओं का अभिवादन करेगा। उत्तरी छोर पर काशी की बालिकाएं कुश्ती के धोबिया पाट के दांव-पेच दिखाएंगी।
प्रभु घाट-चेत सिंह घाट
बौद्ध भिक्षु
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प्रभु घाट पर सौ से ज्यादा बौद्ध भिक्षु घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर ध्यान मुद्रा में अतिथियों का स्वागत करेंगे। उधर, चेत सिंह घाट पर किले के फाटक से लेकर घाट की आखिरी सीढ़ी तक रंगकर्मियों का दल बुद्ध के उपदेश पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत करेगा। इसके अलावा कथक और भरत नाट्यम शैली की मिली-जुली भाव-भंगिमाएं भी आकर्षण का केंद्र होंगी।
निरंजनी घाट
काशी की सधुक्कड़ी परंपरा
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निरंजनी घाट पर काशी की सधुक्कड़ी परंपरा का निर्वाह करने वाले संतों-महात्माओं की अड़ी का नजारा दिखाया जाना है। घाट पर अलग-अलग समूहों में 108 साधु-संतों के बैठने की व्यवस्था की गई है। इस घाट पर भी जगह-जगह केसरिया कपड़ों के छोटे-बड़े फ्रेम लगाए गए हैं। बताया गया कि सौ से अधिक साधु-महात्मा इस घाट पर अड़ी जमाएंगे।
केदार घाट
अभ्यास करते कलाकार
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यहां मथुरा के कलाकारों का दल मयूर नृत्य और फूलों की होली से अतिथियों की अगवानी करेगा। वृंदावन की मोर कुटी का दृश्य प्रदर्शित करने में घाट की सीढ़ियों पर मयूर नृत्य करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। टीवी अभिनेत्री श्रुति शर्मा दिक्कतों दूर करने में लगी हैं। दल का नेतृत्व यश भारती से सम्मानित गीतांजलि शर्मा कर रही हैं, जो स्वयं श्रीराधा की भूमिका में हैं।
राजा घाट
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पेशवाओं की बनारस को दी गई इस धरोहर के साए में सौ से ज्यादा स्कूली छात्राएं स्वच्छता गीत पर कथक शैली में नृत्य पेश करेंगे। नैनीताल के बच्चे इस गीत को प्रस्तुत करेंगे और यह स्वच्छता गीत नैनीताल के डॉ. डीएन भट्ट ने लिखा है। स्वच्छता अभियान के गीत के बोल होंगे-कूड़ा करकट साफ करेंगे बापू हम, बीमारियों को हाफ करेंगे बापू हम...।
राणामहल घाट
नगर के युवा संगीतकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी
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राणामहल घाट के मुख्य प्लेटफार्म पर नगर के युवा संगीतकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी। इन कलाकारों ने वाद्यवृंद के लिए दोपहर के रागों पर आधारित खास शास्त्रीय धुनें तैयार की हैं। तबला और सारंगी समेत 50 वाद्य वृंदों से दी जाने वाली प्रस्तुतियों में दीपक और बहार राग के सुरों को आधार बनाया गया है।
इन घाटों पर भी आयोजन
varanasi
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मानसरोवर घाट पर कबीर पंथियों के स्वर में कबीर के पदों का गायन किया जाएगा तो दरभंगा घाट पर स्थानीय कलाकार राजस्थान के कलाकारों के साथ मिलकर कच्ची घोड़ी का पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसी दौरान राजेंद्र प्रसाद घाट पर नाव और घोड़ों के मुख की कलाकृतियां मोदी और मैक्रों समेत वहां मौजूद लोगों को लुभाएंगी।