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पितृपक्ष 2026: आज पितरों का आह्वान, कल से वंशों पर बरसेगा आशीष; पूर्णिमा तिथि से काशी में होने लगेगी भीड़

Sat, 26 Sep 2026 10:16 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

आज से पितरों को निमंत्रण देकर आह्वान किया जाएगा। कल से पितृपक्ष शुरू होगा। ऐसे में 14 दिन पितरों को तिलांजलि किया जाएगा। इस दौरान चार दिन विशिष्ट तिथि होंगे। वहीं पूर्णिमा तिथि से पिशाचमोचन कुंड पर भीड़ होने लगेगी। 
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पिशाचमोचन में पितरों का तर्पण करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाद्रपद पूर्णिमा पर शनिवार को पितरों को निमंत्रण देकर आह्वान किया जाएगा। प्रतिपदा यानी 27 सितंबर से पितृपक्ष शुरू होगा। इस बार नवमी तिथि के क्षय होने से 14 दिन यानी 10 सितंबर तक पितृपक्ष रहेगा। काशी में पिशाचमोचन कुंड पर पितरों के तर्पण और श्राद्धकर्म के लिए देश-विदेश से लोग आएंगे। पितृपक्ष के अमावस्या सहित चार तिथियों पर भीड़ होगी। कुंड पर तैयारी मुकम्मल कर ली गई है।

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आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से पितृपक्ष शुरू होता है, जो 15 दिनों तक चलता है। इस बार पंचांगों में अष्टमी-नवमी की तिथि एक ही दिन चार अक्तूबर को पड़ रही है। पौराणिक मान्यतानुसार पिशाचमोचन कुंड पर तर्पण व श्राद्धकर्म के लिए भीड़ होगी। यहां लोगों के आने का सिलसिला पूर्णिमा तिथि यानी शनिवार से ही शुरू हो जाएगा।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात ज्योतिषविद प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि पूर्णिमा तिथि पर लोग अपने पितरों को मंत्रों से आमंत्रित कर आह्वान करते हैं और प्रतिपदा से तिलांजलि देते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार अष्टमी तिथि तीन अक्तूबर को सुबह 9:53 से अगले दिन सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के चलते चार अक्तूबर को अष्टमी तिथि रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी और अगले दिन सुबह 5:50 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। इस तरह से नवमी तिथि का क्षय रहेगा।

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पिशाचमोचन कुंड के तीर्थ पुरोहित सौरभ दीक्षित ने बताया कि कुंड पर अमावस्या, पंचमी, त्रयोदशी और एकादशी तिथि को भीड़ होती है। त्रयोदशी पर विशेषकर नारायण बली श्राद्ध होता है। अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात मृत्यु की तिथि वाले श्राद्ध करते हैं। पितृपक्ष पर त्रिपींडी और गया श्राद्ध ज्यादा होता है। श्राद्ध कर्म 12 तरह के होते हैं। मगर, प्रमुख रूप से त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बली, पार्वण श्राद्ध और गया श्राद्धकर्म लोग करवाते हैं। बताया कि पिशाचमोचन कुंड के सात गद्दियों पर रोज 10 से 15 हजार लोग श्राद्धकर्म पहुंचेंगे।

मछलियों के मरने से बचाने को लगे ऑक्सीजन मशीनें
पिशाचमोचन कुंड पर श्राद्धकर्म से भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रशासन की ओर से कुंड की सफाई, प्रकाश की व्यवस्था और यातायात में भी बदलाव किया गया है। वहीं, इस बार कुंड की मछलियों को मरने से बचाने के लिए पानी में ऑक्सीजन की मशीनें व केमिकल डाला गया है। पाथवे को भी दुरुस्त किया गया है।
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