पिशाचमोचन कुंड के तीर्थ पुरोहित सौरभ दीक्षित ने बताया कि कुंड पर अमावस्या, पंचमी, त्रयोदशी और एकादशी तिथि को भीड़ होती है। त्रयोदशी पर विशेषकर नारायण बली श्राद्ध होता है। अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात मृत्यु की तिथि वाले श्राद्ध करते हैं। पितृपक्ष पर त्रिपींडी और गया श्राद्ध ज्यादा होता है। श्राद्ध कर्म 12 तरह के होते हैं। मगर, प्रमुख रूप से त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बली, पार्वण श्राद्ध और गया श्राद्धकर्म लोग करवाते हैं। बताया कि पिशाचमोचन कुंड के सात गद्दियों पर रोज 10 से 15 हजार लोग श्राद्धकर्म पहुंचेंगे।
मछलियों के मरने से बचाने को लगे ऑक्सीजन मशीनें
पिशाचमोचन कुंड पर श्राद्धकर्म से भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रशासन की ओर से कुंड की सफाई, प्रकाश की व्यवस्था और यातायात में भी बदलाव किया गया है। वहीं, इस बार कुंड की मछलियों को मरने से बचाने के लिए पानी में ऑक्सीजन की मशीनें व केमिकल डाला गया है। पाथवे को भी दुरुस्त किया गया है।