सर्व पितृ अमावस्या पर उन मृत व्यक्तियों के लिए श्राद्ध अनुष्ठान और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु ‘पूर्णिमा’, ‘अमावस्या’ या ‘चतुर्दशी’ तिथि पर हुई थी। इस विशेष दिन, सुबह अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। आमतौर पर, श्राद्ध समारोह परिवार के सबसे वरिष्ठ पुरुष सदस्य द्वारा किया जाता है। सर्व पितृ अमावस्या पर अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा की जाती है और फूलों, दीपों और धूप से अपने पूर्वजों से प्रार्थना की जाती है। पूर्वजों के निमत्त पवित्र नदी के जल से तर्पण, अर्घ्य कर दान-धर्म किया जाता है।
फल
- इस दिन अनुष्ठान-पूजा भगवान यम का आशीर्वाद दिलाती है ऐसी मान्यता है।
- पूर्वजों के लिए किए गए अनुष्ठान से उनका परिवार अपने जीवन में सभी प्रकार के पापों और बाधाओं से मुक्त हो जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ तर्पण पूर्वजों की आत्माओं को मुक्ति देने में मदद करता है और मोक्ष दायक होता है।
- यह बच्चों को एक समृद्ध और लंबे जीवन का आशीर्वाद देता है।
- सर्व पितृ अमावस्या व पितृ पक्ष के समाप्त होने पर महानवरात्रि प्रारंभ होती है।