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पितरों को किया श्रद्धा का अर्पण, मांगी मुक्ति की राह

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वाराणसी। पितरों के श्रद्धा के निवेदन का पर्व शुरू होते ही घाट, कुंडों और सरोवरों की रौनक बढ़ गई है। पितृपक्ष की द्वितीया को पिशाचमोचन कुंड पर अर्पण-तर्पण करने वालों का रेला उमड़ा। पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु के बाद व्याधियों से मुक्ति के लिए श्राद्ध किया गया। शनिवार की रात से ही श्रद्धालुओं का तांता कुंड पर लगा रहा। काशी से बाहर या काशी में अकाल मौत के शिकार के लोगों के मोक्ष के लिए पिशाचमोचन कुंड पर त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है।
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काशी के अति प्राचीन पिशाच मोचन कुंड पर होने वाले त्रिपिंडी श्राद्ध के साथ ये मान्यता जुड़ी है कि पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मरने के बाद व्याधियों से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिये पितृ पक्ष के दिनों पिशाच मोचन कुंड पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। देश भर में सिर्फ काशी के ही अति प्राचीन पिशाचमोचन कुंड पर त्रिपिंडी श्राद्ध होता है। विमल तीर्थ पर संस्कृत के श्लोकों के साथ तीन मिटटी के कलश की स्थापना की गई। पिंड दान के बाद लोग गया के लिए रवाना हो गए।
तीर्थ पुरोहित दीपक पांडेय ने बताया कि कहते हैं कि जब पुरखों की आत्माओं का आशीष इंसान को जिंदगी में मिलता है तो उसके जीवन में खुशियां ही खुशियां बनी रहती हैं। माना जाता है कि आकाश से हमारे पुरखे व धरती पर हमारे बुजुर्ग अपनी दुआओं से हमारे जिंदगी में रोशनी बिखेरते रहते हैं। यही कारण है कि पितरों के श्राद्ध के लिए विधिविधान पूर्वक तर्पण आदि करना सभी के लिए आवश्यक होता है जिससे जीवन सुखमय बना रहे।
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