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10 हजार अजन्मी बेटियों का पिंडदान: काशी में तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोज; कन्या भ्रूण हत्या न करने की अपील

Sun, 04 Oct 2026 02:42 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी के प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर पितृपक्ष की मातृ नवमी पर आगमन सामाजिक संस्था ने करीब 10 हजार अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया। वैदिक आचार्यों के सानिध्य में अनुष्ठान हुआ। संस्था का दावा है कि 13 वर्षों में 1.60 लाख से अधिक अजन्मी बेटियों के लिए तर्पण किया जा चुका है।
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दशाश्वमेध घाट पर तर्पण करते डॉ. संतोष ओझा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पितृपक्ष की मातृ नवमी पर दशाश्वमेध घाट पर अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पिंडदान और तर्पण अनुष्ठान किया गया। आगमन सामाजिक संस्था के तत्वावधान में संस्थापक सचिव डॉ. संतोष ओझा के नेतृत्व में करीब 10 हजार अजन्मी बेटियों के लिए वैदिक विधि-विधान से पिंडदान, तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोज कराया गया। अनुष्ठान का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाना और लोगों को इस कुरीति के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।

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दशाश्वमेध घाट पर सुबह सात बजे से ही संस्था के कार्यकर्ता जुटने लगे थे। गंगा की पवित्र मिट्टी से विशेष पिंड वेदी का निर्माण किया गया। गंगाजल, कुशा और अग्नि से भूमि संस्कार के बाद पांच वैदिक आचार्यों के सानिध्य में अनुष्ठान शुरू हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और शांति पाठ के बीच अजन्मी बेटियों की आत्मा की शांति के लिए संकल्प लिया गया।

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जौ के आटे, जौ-तिल, शहद, देसी घी, शक्कर, दूध और गंगाजल से करीब 10 हजार पिंड तैयार किए गए। प्रत्येक पिंड को अजन्मी बेटी के प्रतीक के रूप में स्थापित कर चंदन, फूल-माला, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किया गया। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख कर तर्पण किया गया। अनुष्ठान के अंत में क्षमा प्रार्थना के बाद पिंडों का गंगा में विधि-विधान से विसर्जन किया गया।

डॉ. संतोष ओझा ने कहा कि सनातन परंपरा में बेटियों को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। इसके बावजूद आधुनिक तकनीक के दौर में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति समाज के सामने गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से बेटियों को समान अधिकार और सम्मान देने की अपील की।
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आगमन संस्था के अनुसार, संस्था वर्ष 2001 से महिला सशक्तीकरण और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरण अभियान चला रही है। संस्था का यह 13वां वार्षिक पिंडदान अनुष्ठान था। संस्था का दावा है कि पिछले वर्षों में 1.5 लाख से अधिक अजन्मी बेटियों के लिए तर्पण किया जा चुका है। इस वर्ष 10 हजार पिंडदान के बाद यह संख्या 1.60 लाख से अधिक हो गई।

वैदिक अनुष्ठान का मार्गदर्शन आचार्य पं. दिनेश दुबे, पं. धनंजय तिवारी और पं. सीताराम ने किया। आयोजन में राहुल गुप्ता, हरिकृष्ण प्रेमी, शिव जी, जितेंद्र किरण जादूगर, भानु प्रताप, संतोषी, साधना, कुंदन, लव तिवारी, अजय दुबे, रामबली मौर्य, प्रताप मिश्रा, आशुतोष, अरुण गुप्ता, मदन गुप्ता और लखन समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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