वाराणसी। चोट की वजह से हर साल हजारों खिलाड़ी खेल से दूर हो जाते हैं। उक्त बातें खेल विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद की ओर से आयोजित कार्यशाला में कहीं। कार्यशाला का समापन ‘खेलों में चोटों के पश्चात पुनर्वास’ पर केंद्रित रहा। आयोजन सचिव डॉ. कविता वर्मा ने कहा कि चोट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआत में ही उपचार कराया जाए तो खिलाड़ी को मुश्किल नहीं आती है। चोट की वजह से हर साल हजारों खिलाड़ी शत प्रतिशत आउटपुट नहीं दे पाते हैं। मुख्य अतिथि मेडिसिन विभाग की प्रो. जया चक्रवर्ती, डॉ. शिवा सेल्वराज ने नाक, कान और गले की चोट से उबरने की जानकारी दी। प्रो. अभिषेक पाठक ने कहा कि स्पोर्ट्स न्यूरोलॉजी और पुनर्वास चिकित्सा आज के समय में आवश्यक हैं। संचालन डॉ. रॉबिन सिंह, धन्यवाद डॉ. राजीव सिंह ने किया। इस मौके पर प्रो. अर्चना सिंह, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. खुर्शीद अहमद, डॉ. प्रदीप खालको, डॉ. धीरेंद्र तिवारी, डॉ. हरिराम मौजूद रहे। संवाद