वरुणा के डूब क्षेत्र का सीमांकन करती प्रशासनिक टीम।
वरुणा नदी के डूब क्षेत्र को चिह्नित करने के लिए प्रशासन की ओर से कराए जा रहे सीमांकन से इस क्षेत्र में निर्माण कराने वालों की नींद उड़ गई है। उच्चाधिकारियों के निर्देशन में मंगलवार को नदी के एक किनारे पर आदिकेशव घाट और दूसरे किनारे पर नक्खीघाट तक सीमांकन हुआ। अब तक 550 मकानों का सर्वे किया जा चुका है। सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई है कि इनमें 80 फीसदी मकानों का नक्शा पास नहीं है।
पैमाइश के लिए राजस्व, वीडीए, सिंचाई के अलावा नगर निगम की संयुक्त टीम बनाई गई है। टीम के अधिकारियों की मानें तो डूब क्षेत्र में निर्माण कराने वाले अस्सी फीसदी लोगों के पास नक्शा नहीं है। इन लोगों का नाम पता नोट किया जा रहा है लेकिन गिराने के लिए अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। नापजोख के दौरान पहले के लगाए गए पिलर कई स्थानों से नदारद थे। इससे पैमाइश करने गई टीम को परेशानी हुई। फिर पुराने रिकार्ड के आधार पर नदी की चौड़ाई की नापी कर नए पिलर लगाए गए। डूब क्षेत्र के निर्माणों को चिह्नित किया गया।
इस दौरान वरुणा किनारे खलबली मची रही। नए सिरे से कराए जा रहे वरुणा के सीमांकन कार्य की मानीटरिंग खुद शासन स्तर पर की जा रही है। इसे लेकर पैमाइश में लगी टीम के अलावा उससे जुड़े अधिकारी भी सतर्कता बरत रहे हैं। पहले के लगाए गए अधिकतर पिलर का पता नहीं चल रहा है। टीम के सदस्यों की मानें तो कई पिलर जेसीबी से कराई जा रही ड्रेजिंग के दौरान भी उखड़ गए हैं। इसके चलते पैमाइश में काफी दिक्कत आ रही है। पहले पुराने रिकार्ड से नदी की चौड़ाई नापी जा रही है और वहां पर पिलर लगाया जा रहा है। उसके बाद 50-50 मीटर की दूरी तक निशान लगाया जा रहा है। इन इलाकों को अति जोखिम क्षेत्र घोषित किया जाएगा। इसके बाद डूब क्षेत्र के अवैध निर्माणों को हटाने की दिशा में वीडीए की ओर से कार्रवाई की जाएगी।