उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन वाराणसी के शाखा मंत्री विंध्यवासिनी यादव कहा कहना है कि बजट में रेल कर्मचारियों के लिए कुछ भी खास नहीं है, इससे कर्मचारियों में निराशा है। बजट में कर्मचारियों की 15 लाख तक आय टैक्स फ्री करना चाहिए था। पुरानी पेंशन बहाली, न्यूनतम वेतन बढ़ाने और पीपीपी बंद करने और रेल में खाली पद भरने, निजीकरण निगमीकरण का आदेश वापस लेने पर कोई फैसला नहीं हुआ। इन अहम मुद्दों पर कुछ नहीं होने से कर्मचारियों को निराशा हुई है। इस बजट से कर्मचारियों को बहुत उम्मीद थी।
विंध्यवासिनी यादव
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष शशिकान्त श्रीवास्तव ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने किसी प्रकार की राहत छोटे कर्मचारियों को नहीं दी है। वित्त मंत्री ने टैक्स मे छूट की जो घोषणा की है, उसमे कर्मचारी चाहें तो पुरानी व्यवस्था के तहत आयकर भर सकते हैं, वैकल्पिक व्यवस्था लागू किया जाना साबित करता है कि किसी भी प्रकार से राहत की उम्मीद न करें। बल्कि हम उम्मीद लगाए बैठे थे कि समूह ग एवं घ के कर्मचारियों को आयकर से मुक्त रखा जाएगा। कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन रुपया 26000 मासिक किया जाएगा। कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी सहित पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाएगी।
शशिकान्त श्रीवास्तव
बलिया के चार्टेड एकाउंटेंट सन्नी सिंह ने बताया कि इस बार वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट सामान्य रहा है। आम लोगों को इस बजट से कोई विशेष फायदा नहीं है। इस बार बजट में नया टैक्स स्ट्रक्चर शामिल किया गया है। हालांकि इस बार के बजट में चैप्टर 6ए जैसे एलआईसी, टैक्स सेविंग स्कीम, एजूकेशन लोन, होम लोन पर इसका लाभ नहीं मिलेगा, टैक्स स्लैब पुराना है, कुछ हद तक पांच लाख से अधिक के स्लैब पर कम किया गया है।
सन्नी सिंह
आडिट का लिमिट एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ कर कर दिया गया है, जिसमें शर्त यह है कि सिर्फ पांच फीसदी टर्न ओवर हो। करदाताओं को ई कर निर्धारण अपील लेबल तक लगा दिया गया हैं, जिससे करदाताओं का आर्थिक दोहन नहीं हो सकेगा, किसानों के लिए इस बजट में कई स्कीम दी गई हैं। 20 लाख किसानों को पानी का पंप देने की स्कीम है, किसानों के जमीनों पर सोलर पावर यूनिट लगाने की योजना जो सराहनीय है, मध्यम वर्ग के लिए राहत है, इस बार बजट में दोनों स्ट्रक्चर का लाभ ले सकते हैं।
छात्रों के लिए हितकर नही है बजट
बीएचयू के बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र देव भारद्वाज का कहना है कि छात्रों के लिए यह बजट कहीं से भी हितकारी नही लगता है। अब एजुकेशन लोन के ब्याज पर जो टैक्स में छूट थी, उसको भी खत्म कर दिया गया है। इससे प्रतिभावान छात्रों का मनोबल टूटेगा। वहीं डीएवी पीजी कालेज की अंकुर बागची ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एफडीआई लागू करने की घोषणा गलत है। इससे शिक्षा का स्तर भले ही सुधरे लेकिन शिक्षा के बाजारीकरण को बल मिलेगा। कम से कम एजुकेशन लोन के ब्याज पर तो छूट बरकरार रखनी चाहिए थी।
देव और अंकुर
बेरोजगारी दूर करने जैसा कुछ भी नहीं
बीएचयू के डॉ. अनिल पांडे का कहना है कि देश में कई तरह के संस्थान खोलने की घोषणा हुई है, जिसका हम सभी समर्थन करते है। सरकार ने डाक्टरों की कमी पर भी विचार किया है, जो कि सराहनीय कदम है। इन सबके बीच एक बड़ा प्रश्न भी निकल रहा है कि आखिर कैसे? सरकार ने एजुकेशन लोन को समाप्त कर दिया है। इकोनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा कैसे मिलेगा इस पर कोई चर्चा नहीं है। अस्पताल या विद्यालय की जरूरत में गांव भी आते है। उन गांवों तक सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इन सबके बाद भी बजट बेरोजगारी को दूर करने जैसी कोई बात नहीं दिख रही। सरकार को जल्द ही बेरोजगार कानून लाना चाहिए।
डॉ. अनिल पांडे
देश प्रगतिशील से समृद्ध राष्ट्र की ओर हो रहा उन्मुख
वाराणसी के बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र सरकार का आम बजट कल्याणकारी है। वास्तव में आज के आम बजट ने सरकार की सार्थक सोच और देश के हर वर्ग के प्रति चिंता जाहिर की है। भारत को प्रगतिशील से समृद्ध देश की ओर उन्मुख करने की ओर सरकार ने ठोस कदम बढ़ाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा आदि के लिए घोषित की गई योजनाओं और आय कर में राहत आम आदमी के लिए केंद्र सरकार की बेहद ही नेक पहल है।
अनूप कुमार श्रीवास्तव