वाराणसी। चटपट शादी और त्वरित तलाक, गर्दभ राग और कजरौटों, मुखौटों से लोगों का सम्मान। यह सब महामूर्ख मेले में हुआ। मूर्ख दिवस की शाम आयोजित इस मेले का आनंद लेने राजेंद्र प्रसाद घाट पर हजारों की भीड़ उमड़ी। उल्टी-पुल्टी हरकतों को देख लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
रही-सही कसर समारोह में आए कवियों ने पूरी कर दी, जिन्होंने अपने व्यंग्य शब्द बाणों से व्यवस्था के हर पुर्जे की ठोक-ठाक की। कविताओं के केंद्र में इस बार की थीम ‘जन की बात’ रही।
चिकित्सक जोड़ी डॉ. मनमोहन श्याम को दुल्हन की तरह सजाया गया था। दूल्हा बनीं डा. अंजना गुप्ता बारात लेकर पहुंची। दोनों की शादी कराई गई। लंठ पुरोहितों ने मोमबत्ती की रोशनी में ऐसा गड़बड़ मंत्र पढ़ा और नाउन बने साहित्यकार रामगोपाल सराफ ने ऐसा ज्ञान दिया कि विवाह के तत्काल बाद ही तलाक की नौबत आ गई।
छूट्टा-छुट्टी होते ही हर बार की तरह मुरारी यादव ने गर्दभ ध्वनि निकालनी शुरू कर दी। डमरू दल और नगाड़ा बजने लगा। इस भागमभाग हंगामे के बीच कहकहे फूटते रहे। संचालन कर रहे आयोजक संस्था शनिवार को गोष्ठी के अध्यक्ष पं. धर्मशील चतुर्वेदी ठहाकों हंसने की चाह लिए एकत्रित जन समुदाय की हौसला आफजाई करते रहे।
मुख्य अतिथि दीपक मधोक,भारती मधोक, पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रबंधक विवेक झा, डॉ. अशोक राय को मुखौटा, कजरौटा, महिलाओं की चोटियां, झुनझुना देकर सम्मानित किया गया।
संचालन कर रहे सांड बनारसी ने चुटीले अंदाज में तंज कसा कि ‘सांड़ का निवेदन है मूर्खता करो जी बंधु, मूर्खता है हमारा जन्मसिद्ध अधिकार’ सुनाकर व्यंग्य के कारवां को आगे बढ़ाया।
कमलेश द्विवेदी, हलचल मिर्जापुरी, उजबक आजमगढ़ी, राधेश्याम भारती, डॉ.रमेश शर्मा, एस धुरंधर, विकास बौखल, समीर शुक्ला, गज्जे भइया, राम बाबू सिकरवार, झगड़ू भइया, रेयाज बनारसी, श्याम लाल यादव और विजेंद्र मिश्र दमदार आधी रात तक लोगों को कविताओं से गुदगुदाते रहे।