रसोइया रुकमणी और ममता ने बताया कि पहले जो मिलता था, उसे ही वह बनाती थी। 22 अगस्त को दाल या सब्जी नहीं मिलने पर बच्चों को रोटी-नमक खाने को दिया गया था। उन्होंने जांच टीम को यह भी बताया कि पहले भी एक सप्ताह में सिर्फ एक लीटर दूध बच्चों के लिए लिया जाता था, लेकिन अब नौ से दस लीटर दूध बच्चों को दिया जाता है।
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जांच टीम ने स्थानीय ग्रामीणों से भी पूछताछ की। पीसीआई टीम के सदस्य संजीव कुमार पंवार ने बताया कि अलग-अलग लोगों से बात की गई है। जांच रिपोर्ट जल्द ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस सी के प्रसाद को सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।