नमामि गंगे परियोजना का उद्घाटन करते रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा।
काशी में अस्तित्व खो चुकी असि नदी अब अपने पुराने स्वरूप में बहेगी। केंद्र सरकार ने इसकी सुधि ली है। नदी की सफाई के साथ ही उसमें पानी छोड़ने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि नदी के पुनरुद्धार के साथ ही उसकी अविरलता को भी बहाल किया जा सके। असि के कायाकल्प का यह पायलट प्रोजेक्ट नमामि गंगे अभियान के तहत तैयार किया गया है।
तीन महीने के अंदर इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया जाएगा। बता दें कि ‘अमर उजाला’ ने नाले में तब्दील हो चुकी असि नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए मुहिम छेड़ रखी है। कई जन संगठन मिलकर असि के उद्धार की आवाज उठा रहे हैं। अब केंद्र सरकार ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए बड़ी पहल की है। केंद्र सरकार ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) को कार्ययोजना तैयार कर काम शुरू कराने का निर्देश दिया है।
गुरुवार को दशाश्वमेध स्थित राजेंद्र प्रसाद घाट पर नमामि गंगे अभियान के उद्घाटन के मौके पर एनएमसीजी के एडिशनल डायरेक्टर पुष्कल उपाध्याय ने बताया कि गंगा के साथ वाराणसी की पहचान से जुड़ी असि नदी को अविरल और निर्मल बनाने की कार्ययोजना बना ली गई है। इसके तहत उद्गम स्थल से लेकर संगम तट तक असि नदी को मूल स्वरूप में लाया जाएगा। नदी में गिरने वाले छोटे-बड़े नालों का सीवेज बंद किया जाएगा। इस मौके पर मौजूद एनएमसीजी तकनीकी कंसलटेंट एएन गुप्ता ने बताया कि नदी किनारे पौधे लगाकर उन्हें हरा-भरा बनाया जाएगा।