गंगा में नाव या जलयान के संचालन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित बोट चालक और मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। बीएनएस की धारा 282 (लापरवाही) के तहत कार्रवाई होगी। इसमें छह माह तक की जेल या 10 हजार रुपये तक जुर्माना, अथवा दोनों का प्रावधान है। चलती नाव पर सवारियां सेल्फी नहीं लेंगी और रील्स बनाने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
जल पुलिस प्रभारी राजकिशोर पांडेय ने बताया कि नाविकों को निर्देश दिए गए हैं कि बोट पर क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं। गंगा में बोट संचालन के दौरान सवारियों को लाइफ जैकेट पहनाना अनिवार्य होगा। बोट को अनियंत्रित या अत्यधिक तेज गति से न चलाया जाए।
अस्सी घाट से नमो घाट की ओर जाने वाली नावें अपने दाहिने (रेता) साइड से चलें और नमो घाट से अस्सी घाट की ओर जाने वाली नावें अपने दाहिने (घाट) साइड से ही संचालित हों। खराब या अत्यधिक धुआं छोड़ने वाली बोट का संचालन गंगा में न किया जाए। चलती बोट पर सवारियों को खड़ा कर सेल्फी या फोटोग्राफी न कराई जाए। तय किराये से अधिक किराया न लिया जाए। सवारियों को चढ़ाते-उतारते समय लापरवाही न बरती जाए।
सवारियों से दुर्व्यवहार या विवाद न किया जाए। मादक पदार्थों का सेवन कर बोट का संचालन न करें। बिना पंजीकरण के बोट का संचालन न करें और प्रशासन द्वारा निर्धारित समय के बाद बोट का संचालन न किया जाए।