भारतीय हॉकी का जब भी जिक्र होगा तो दद्दा मेजर ध्यानचंद, केडी सिंह बाबू और मोहम्मद शाहिद का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। 14 अप्रैल 1960 को वाराणसी में जन्मे शाहिद 1980 में मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे। अपनी ड्रिबलिंग स्किल के लिए यह बनारसी धुरंधर दुनिया भर में प्रसिद्ध था।
1979 में फ्रांस में हुए जूनियर विश्व कप हॉकी में शाहिद ने असाधारण खेल से तहलका मचा दिया था। डेढ़ दशक तक भारतीय हॉकी की पहचान रहे शाहिद को भारतीय हॉकी के उत्थान में उनकी अग्रणी भूमिका के लिए सरकार ने उन्हें अर्जुन अवार्ड और पद्मश्री सम्मान से नवाजा।
1980 में कराची (पाकिस्तान) में चैंपियंस ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ फॉरवर्ड चुने जाने वाले शाहिद 1986 में एशियन ऑल स्टार टीम के लिए चुने गए थे। 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भी शाहिद भारतीय टीम का हिस्सा थे। 1982 में दिल्ली में हुए एशियाड में शाहिद ने टीम को रजत पदक दिलाया था।
1986 के सियोल एशियन गेम्स में शाहिद की मौजूदगी वाली टीम को कांस्य पदक मिला था। 1986 में ही लंदन में हुए विश्व कप में भी शाहिद ने हुनर दिखाया था। भारतीय रेलवे (डीरेका) से जुड़ने के बाद शाहिद ने राष्ट्रीय स्तर की दर्जन स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। 1988 में दिल्ली में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रेलवे की टीम चैंपियन रही।