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पर्यटकों को छोड़ पॉलिथीन रखने पर चालान काट रही पर्यटन पुलिस

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वाराणसी। ईमानदारी और कर्मनिष्ठा के बल पर वर्ल्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराने वाली पूर्व सैनिकों से सजी पर्यटन पुलिस को पॉलिथीन रखने वालों का चालान काटने के लिए लगा दिया गया है। यही नहीं, इनसे लिपिकीय काम भी कराए जा रहे हैं। ऐसे में काशी आने वाले सैलानियों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। कई बार वह आवश्यक जानकारी व मार्गदर्शन के अभाव में भटक भी जाते हैं।
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कुछ साल पहले पर्यटक पुलिस का गठन किया गया। सभी पदों पर पूर्व सैनिकों की नियुक्ति की गई, ताकि सुरक्षा देने के साथ ही पर्यटकों की भाषा समझकर मदद की जा सके। चार प्वाइंट निर्धारित कर उनकी ड्यूटी लगाई गई। धीरे-धीरे ड्यूटी का दायरा और समय भी बढ़ाया गया। 33 जवानों वाली पर्यटक पुलिस को अब सात स्थानों पर तैनात किया जाता है। सारनाथ को छोड़कर कहीं 16 घंटे तो कहीं 24 घंटे ड्यूटी करनी होती है। समय बीतने के साथ इनकी जिम्मेदारी भी बदल दी गई। अब इन्हें वीआईपी ड्यूटी में भी लगाया जाने लगा है। मदद न मिलने से पर्यटकों की नजरों में देश की छवि भी खराब हो रही है।
कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए तो पर्यटन विभाग कार्यालय में बैठाया
मकबूल आलम रोड स्थित पर्यटन विभाग कार्यालय से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की जगह इन्हें अघोषित तौर पर बैठा दिया गया। यहां एक डिस्पैचर तो दो पर्यटक पुलिस लिपिकीय काम कर रहे हैं। हद तो तब हो गई जब पर्यटन विभाग को मिली पॉलिथीन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पर्यटक पुलिस पर थोप दी गई। एक इंस्पेक्टर और दो सिपाही शहर में घूम-घूम कर पॉलिथीन रखने वालों का चालान काट रहे हैं।
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साहब को कराने होते हैं दर्शन
अधिकारियों के निर्देश पर पर्यटक पुलिस को बाहर से आने वाले ‘साहब’ को दर्शन भी कराने होते हैं। उनके पारिवारिक सदस्य भी आते हैं तो भी इनकी ड्यूटी लगाई जाती है। घाट, स्टेशन आदि जगहों पर ड्यूटी में कटौती कर यह सुविधा दिलाई जाती है।
रेलवे स्टेशन पर 24 घंटे की है ड्यूटी
पर्यटक पुलिस में दो इंस्पेक्टर, चार सब इंस्पेक्टर व 27 कांस्टेबल शामिल हैं। कैंट रेलवे स्टेशन पर तैनात कर्मी को 24 घंटे तो दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, रोडवेज और एयरपोर्ट पर 16 घंटे ड्यूटी करनी होती है। सारनाथ में सुबह नौ से पांच बजे तक आठ घंटे की ड्यूटी रहती है।
जरूरत पड़ी तो बना दिए जाते हैं चालक व अंगरक्षक
पर्यटक पुलिस की नौकरी संविदा पर आधारित है। हर साल कांट्रैक्ट रिन्यू किया जाता है। दोबारा उन्हीं को मौका मिलता है जिन्हें स्थानीय अधिकारी चाहते हैं। ऐसे पर्यटक पुलिस को नौकरी बचाने के लिए कभी साहब का ड्राइवर तो कभी अंगरक्षक और पथ प्रदर्शक बनना पड़ता है।
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