स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परशुराम राय
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स्वततंत्रता संग्राम के दौरान वर्ष 1942 व 1943 में अंग्रेजो से लोहा लेकर उनका दांत खट्टा करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परशुराम राय (94) अंतत: कोरोना से जंग हार गए। मंगलवार की सुबह साढ़े सात बजे उन्होंने पहड़िया स्थित एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। हरिश्चन्द्र घाट पर अंत्येष्टी के दौरान उन्हें गॉड ऑफ ऑनर दिया गया।
जानकारी के अनुसार लगभग 10 दिन पूर्व स्वततंत्रता संग्राम सेनानी परशुराम राय कोरोना वायरस से संक्रिमत हो गए। परिजनों ने उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में बने कोविड सेंटर में भर्ती कराया। अस्पताल में अव्यवस्था एवं मूलभूत सुविधाओं के अभाव को देखते हुए परिजनों ने 14 अप्रैल को घर पर लाकर होम क्वारंटीन कर दिया। सोमवार की रात परशुराम राय की हालत खराब होने पर परिजनों ने पहड़िया स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों ने बताया कि मंगलवार की सुबह अचानक उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। लगभग सुबह साढ़े सात बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
परशुराम राय देश की आजादी में सक्रिय भूमिका निभाते हुए दो बार जेल गए। बलिया में 19 अगस्त 1942 को परशुराम राय चित्तु पांडेय के नेतृत्व में पहली बार कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहराया था और जेल गए। दूसरी बार जनवरी 1943 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जुलूस निकालने के आरोप में जेल गए। परशुराम राय का जन्म 21 जुलाई 1927 को बलिया के उजियार घाट ग्राम में हुआ था। वह वन विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद सारनाथ के गंज मुहल्ले स्थित विद्याश्रम में छोटे बेटे अंजनी राय के साथ रहते थे।