निजी स्कूलों में प्रवेश के नाम पर मनमानी फीस वसूलने, विद्यालय से कॉपी-किताबें, स्टेशनरी और ड्रेस न बेचने के लिए बड़ी-बड़ी बातें ही होती हैं। शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्कू लों के प्रबंधन को चेतावनी जारी की और स्कूल प्रबंधन भी ऐसा न करने की बात कह रहे हैं। खास बात यह है कि अधिकांश निजी स्कूलों में आधे से अधिक दाखिले होने और तमाम अभिभावकों की जेबें खाली होने के बाद शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन को इसकी याद आई है। सोमवार को पूर्वांचल स्कूल एसोसिएशन ने इस पर बैठक कर डीआईओएस को निर्णय की जानकारी दी।
सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के विद्यालयों में मार्च के दूसरे सप्ताह में परीक्षाएं खत्म होने के बाद से ही दाखिले शुरू हो जाते हैं। पहले अभिभावकों को प्रवेश फार्म लेने से लेकर टेस्ट दिलाने के लिए कवायद करानी पड़ती है। किसी तरह प्रवेश होने के बाद हर साल बढ़ाई जा रही मनमानी फीस से अभिभावकों की कमर टूट जाती है।
सामाजिक संस्थाओं, अधिवक्ताओं, विद्यार्थी परिषद आदि संगठनों ने मनमानी फीस, कॉपी-किताबों बिक्री के विरोध में आंदोलन शुरू किया है तब अधिकारियों की नींद टूटी। डीआईओएस ने 13 अप्रैल को आदेश जारी कर विद्यालयों को बिना मान्यता कक्षाएं न चलाने के साथ ही शासन द्वारा निर्धारित मानक से अधिक फीस और कॉपी-किताब, ड्रेस आदि के नाम पर धन वसूली न करने की बात कही है। साथ ही शिकायत मिलने पर मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी है। इस पर सोमवार को पूर्वांचल स्कूल एसोसिएशन ने कई अहम फैसले लिए। अब सवाल यह है कि इसका पालन कैसे हो पाएगा। कारण, कुछ चुुनिंदा विद्यालयों के ड्रेस, कापी-किताब, बेल्ट ऐसे हैं जो शहर के चिन्ह्रित दुकानों पर ही मिलते हैं और अभिभावकों को मजबूरी में उन्हीं दुकानों से ही ये सामान लेने पड़ेंगे।