पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हमारे भारत में अभूतपूर्व विभूतियां हुई हैं उसमें एक विभूति पं. मनु शर्मा हैं। वह जिस नगरी में रहते थे वह अक्खड़ों और फक्खड़ों की। उनका तन काशी में पर मन ब्रज में रहा। कहना अलग है सहना अलग है पढ़ना अलग है जीना अलग है। हमारे पं. मनु शर्मा केवल लेखक नहीं, पाठक नहीं थे जीवक थे। वह जीते थे रचनाओं में कृतियों में संस्कृतियों में , काशी में, बनारस में और ब्रज में। माता पिता के नाम से तो कई पुत्र जाने जाते हैं लेकिन पुत्र वही महान है जिसके नाम से माता पिता जाने जाएं। लोग चले जरूर जाते हैं कि कुछ लोग ऐसे हैं जाकर भी दिल में बस जाते हैं। उनकी जीवनशैली, उनके शब्द, जीवनचर्चा, जीवनचर्या और उनकी चेतना, उनका औरा और उनके सोचन व जीने का ढंग रह जाता था, रह जाता है रहता रहेगा। उन्हीं एक प्रसिद्ध साहित्यकारों में एक हैं हमारे बाबूजी मनुशर्माजी।
काशी हमारे भारत की शान
हमारे दादा गुरु का शरीर मणिकर्णिका में पूर्ण हुआ। काशी के 15 दिन हमने काशी की गलियों में गुजारे हैं। इन 15 दिनेां के समय काल में दुर्गाकुंड, संकटमोचन, मानस मंदिर, शीतला घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट, गंगाआरती, अन्नपूर्णा माता, वो काशी की गलियां, वो काशी का ज्ञान, वो काशी के विद्वान वो काशी का पान। सबका आनंद लिया। अक्खड़ भी देखे, फक्खड़ भी देखे। बाबाविश्वनाथ को भी देखा फिर भैरवनाथ को भी देखा। अष्टभैरवों के भी दर्शन किए। उस संगीत विधा को भी देखा। उन परंपराओं को भी देख, उस प्राचीनता को भी देखा। तब यही लगा काशी हमारे भारत की शान है। हमारे भारत का मुकुट, हमारे भारत का सिरमौर काशी है।
अग्निरथ के सारथी का हुआ लोकार्पण
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हमारे मनु में पद्मश्री पं. मनु शर्मा पर आधारित डॉ. इंदीवर की पुस्तक अग्निरथ का सारथी का लोकार्पण पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, हेमंत शर्मा व यतींद्र मिश्र ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य और हेमंत शर्मा ने दीप जलाकर किया। मंच संचालन यतींद्र मिश्र ने किया।
शताब्दी वर्ष में होगा ग्रंथ और कविताओं के संग्रह का प्रकाशन
वाराणसी। पं. मनु शर्मा के पुत्र वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने कहा कि पिताजी के शताब्दी वर्ष के आयोजन को यादगार बनाने के लिए हम लोग कार्ययोजना बना रहे हैं। शताब्दी वर्ष में हम लोग उनकी कविताओं के संग्रह और ग्रंथ के प्रकाशन की योजना बना रहे हैं। आज प्रख्यात साहित्यकार, पौराणिक और सांस्कृतिक उपन्यासों के पुरोधा पद्मश्री मनु शर्मा की जयंती है। वे जीवित होते तो इस 28 अक्तूबर को 98 बरस पूरे करते। पुराने इतिहास में रमना, लोगों से मिलना जुलना, संगीत में विचरना, खूब पढ़ना और पढ़ाना, उत्सव मनाना और लोगों को इकठ्ठा करके भोजन कराना उन्हें अच्छा लगता था। इसी परंपरा के तहत यह आयोजन है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मेयर अशोक तिवारी ने कहा कि पं. मनु शर्मा का जहां जन्म हुआ उस गली का नाम उनके नाम पर किया जाएगा। इसके साथ ही कबीरचौरा में स्थान का चयन करके पं. मनु शर्मा की मूर्ति स्थापित की जाएगी।
हुसैन बंधुओं ने गाइए गणपति जग वंदन से की शुरूआत
हमारे मनु का समापन पद्मश्री उस्ताद अहमद हुसैन व मोहम्मद हुसैन के गायन से हुई। हुसैन बंधुओं ने गायन की शुरूआत गाइए गणपति जग वंदन...से की। इसके बाद शिव स्तुति चंद्रभाल जटा गंगधार और कृष्ण स्तुति हे राधे रानी दे डारो बंशी मोरी...प्रस्तुत किया। श्रोताओं की मांग पर उन्होंने गजलों की शुरूआत मैं हवा हूं कहां है वतन मेरा के बाद अपने सुप्रसिद्ध गजल नजर मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो...सुनाया।
ये रहे मौजूद
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री रविंद्र जायसवाल, आयुषमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।